(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "यादगार शब्दों का सफर" साझा संकलन से)
दो बहनें प्रज्ञा और आस्था स्कूटी में शहर से दूर 20 किलोमीटर चिड़ियाघर की तरफ जा रहे थे ।आस्था वाहन चला रही थी ,पीछे से प्रज्ञा आवाज दी अरे आस्था गाड़ी थोड़ा धीरे चलाना, रास्ते में मनचले लड़के लोग एक्शन मारकर चलते हैं , थोड़ी देर होगा और क्या । फिर भी थोड़ा रुक-रुक कर जाने लगे रास्ते में जो अच्छा लगता वह उनकी तस्वीर व वीडियो बना लेते थे ।
चिड़ियाघर पहुंचते ही दोनों चहक उठे बोले अरे देखो बंदर का छोटा सा बच्चा कितना प्यारा है आओ इसको चना खिलाते हैं, तभी फोन की घंटी बजी मां बोली बिटिया घर जल्दी लौट आना राशन व सब्जी भी लाना है और तुम्हारे पिताजी को सर्दी खांसी भी है ।
आस्था बोली मां दुकान का लिस्ट व्हाट्सएप कर दो मैं थैला व पैसा रखी हूं सब्जी, दवाई भी लेते आऊंगी फिर वह दुकानदार को लिस्ट भेज कर बोलिए भैया यह सामान आधे घंटे में निकाल देना मैं सब्जी खरीद कर आती हूं और हां साथ में सर्दी खांसी की काढ़ा बनाने वाली जड़ी बूटी भी लिख दी हूं वह भी निकाल देना । दोनों बहनें सूर्यास्त से पहले घर आई खाना बनाते हुए मां को मोबाइल में खींचे हुए तस्वीर तथा वीडियो को दिखाते हुए वे बोले मां देखो ना यह बच्चा अपने बीमार मां को नहला रहा है। और हां मां यह बहुत ही गरीब लड़की है अपने पिता की दुकान में ग्राहक सेवा के साथ-साथ अपने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर रही है ।
तीसरी वीडियो को दिखाते हुए वह दोनों बोली मां यह दोनों भैया को देखो सब की दुकान व घर के मुख्य दरवाजे में सदवाक्य स्टीकर लगा रहे हैं ।
यह सब देख सुनकर मां की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी वह सोच रही थी कि खेलने कूदने की इस उम्र में मेरे दोनों बच्चियां कितना बड़ा सोच रखती हैं ।
उद्देश्य:-
मोबाइल व समय का सदुपयोग संस्कारमय चिंतन के लिए प्रेरित करना ।
💐💐💐💐💐💐
© ऋतुराज "बसंत"
अभनपुर, वार्ड नंबर 10, जिला - रायपुर (छत्तीसगढ़)
93409 56001
--------------
: परिचय :
• नाम - बसंत कुमार साहू
• उपनाम - "ऋतुराज " बसंत
• जन्म तिथि - 03/04/1971
• पिता का नाम - हरखूराम साहू
• माता का नाम - राधिका बाई
• शिक्षा - स्नातक , पी. एम. ओ.
• व्यवसाय - कुटीर उद्योग
. पता - अभनपुर,वार्ड नंबर 10,जिला -रायपुर ( छत्तीसगढ़ )
• मोबाइल नंबर - 9340956001
• जीवन क्रम - जन्म से छः माह पूर्व पिता व तीन माह की आयु उपरांत माता द्वारा त्याग , परवरिश ननिहाल में हुआ । दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई नियमित छात्र के रूप में मजदूरी करते हुए पूरा हुआ । तत्पश्चात 12वी , स्नातक ( स्वाध्यायी छात्र ) व आई. टी. आई. की पढ़ाई स्वयं की व्यवसाय ट्रेन व बाजारों में चना बेचते हुए संपन्न हुआ ।
• कविता लेखन का उद्देश्य - सन 1993 को गायत्री परिवार व साधनात्मक गतिविधि में शामिल होने के पश्चात समाज और संगठन में व्याप्त बिखराव , नशा, फैशन , कुरीतिया , षड्विकार जैसे बुराइयों से अवगत होकर उनके प्रति जन सामान्य को सजग करना ।
• प्रेरणा स्त्रोत - अखंड ज्योति , युग निर्माण पत्रिका , आध्यात्मिक अनुभूति और स्व प्रेरणा।
• रचना के प्रकार - आध्यात्मिक , देशभक्ति तथा प्रेरक गीत ।
• भाषा - हिंदी और छत्तीसगढ़ी ( तत्भव और तत्सम शब्दों का समावेश )
---------------------------------------------------------------------------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363
मेरी कविता जीवन का सार - ऋतुराज "बसंत" (गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "यादगार शब्दों का सफर" साझा संकलन से)
(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "यादगार शब्दों का सफर" साझा संकलन से)
मेरी गीत न हंसी समंदर , ना मनोरंजन आधार है ।
मेरी कविता की पंक्ति में ,जीवन का इक सार है ।।
नहीं हैं केवल शब्द समुच्चय , इसमें तो विज्ञान हैं ।
अपनाना गर चाहो इसमें , ऋषि मुनि का ज्ञान हैं ।।
हीरा तुमको बना ये देगा , एक धधकता अंगार है।।1।।
मेरी कविता..............................
परिवार में कैसे? रहना , खुद को कैसे गढ़ना है।
कीचड़ में भी रहकर हमको , कमलनाल सा रहना है।।
ऐसे ही सर्वोत्तम बातें , ज्ञान का भंडार हैं।।2।।
मेरी कविता.............................
काम,क्रोध, मद,लोभ से बचकर , कैसे हमको रहना है।
जहां पीड़ित हो मानव उसका , सेवा भी तो करना है ।।
शांति और संतोष हैं इसमें , प्यार व सहकार है ।।3।।
मेरी कविता.............................
नशापान का त्याग है करना , स्वस्थ हमें अब रहना है ।
अच्छे चिंतन को अपनाने , सत्साहित्य भी पढ़ना है ।।
अपना मन को निर्मल करने , का अदभुत ये द्वार है।।4।।
मेरी कविता..................................
💐💐💐💐💐💐
© ऋतुराज "बसंत"
अभनपुर, वार्ड नंबर 10, जिला - रायपुर (छत्तीसगढ़)
93409 56001
--------------
: परिचय :
• नाम - बसंत कुमार साहू
• उपनाम - "ऋतुराज " बसंत
• जन्म तिथि - 03/04/1971
• पिता का नाम - हरखूराम साहू
• माता का नाम - राधिका बाई
• शिक्षा - स्नातक , पी. एम. ओ.
• व्यवसाय - कुटीर उद्योग
. पता - अभनपुर,वार्ड नंबर 10,जिला -रायपुर ( छत्तीसगढ़ )
• मोबाइल नंबर - 9340956001
• जीवन क्रम - जन्म से छः माह पूर्व पिता व तीन माह की आयु उपरांत माता द्वारा त्याग , परवरिश ननिहाल में हुआ । दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई नियमित छात्र के रूप में मजदूरी करते हुए पूरा हुआ । तत्पश्चात 12वी , स्नातक ( स्वाध्यायी छात्र ) व आई. टी. आई. की पढ़ाई स्वयं की व्यवसाय ट्रेन व बाजारों में चना बेचते हुए संपन्न हुआ ।
• कविता लेखन का उद्देश्य - सन 1993 को गायत्री परिवार व साधनात्मक गतिविधि में शामिल होने के पश्चात समाज और संगठन में व्याप्त बिखराव , नशा, फैशन , कुरीतिया , षड्विकार जैसे बुराइयों से अवगत होकर उनके प्रति जन सामान्य को सजग करना ।
• प्रेरणा स्त्रोत - अखंड ज्योति , युग निर्माण पत्रिका , आध्यात्मिक अनुभूति और स्व प्रेरणा।
• रचना के प्रकार - आध्यात्मिक , देशभक्ति तथा प्रेरक गीत ।
• भाषा - हिंदी और छत्तीसगढ़ी ( तत्भव और तत्सम शब्दों का समावेश )
---------------------------------------------------------------------------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363
धैर्य बनाए रखना है - ऋतुराज "बसंत" (गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "यादगार शब्दों का सफर" साझा संकलन से)
(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "यादगार शब्दों का सफर" साझा संकलन से)
आओ मित्रों सोच समझ लो , जीवन कैसे जीना है ।
अच्छे बुरे सभी पलों में , धैर्य बनाए रखना है ।।
गुस्सा गर करते हैं कोई , सदभावना तुम पेश करो ।
शांत अगर उनको करना तो , द्वेष भाव तुम नहीं रखो ।।
मांग पूरा न होने पर भी , किसी तरह न गम करो ।
आशाएं न ज्यादा तुम भी , कभी किसी से किया करो ।।
जो भी मिला हुआ है तुमको , खुशी उसी में ढूंढना है ।।1।।
अच्छे बुरे .......
अगर दुखी करता कोई तो , कष्ट स्वयं भी पाता है ।
जो भी जैसे कर्म है करता , फल वैसा मिल जाता है ।।
क्रोध वश में आकर तुम भी , कोई न अपराध करो ।
कर्मफल तो अटल सत्य है , सोच यही तुम माफ करो।।
मन को अपना शांत बनाने , स्वाध्याय भी करना है ।।2।।
अच्छे बुरे ........
आत्मा का तो स्वधर्म ही , शुद्ध मन व शांति है ।
ध्यान योग व सद्चिंतन से , हमको ये सब मिलती है ।।
अच्छी पुस्तक पढ़ने में न , थोड़ा भी प्रमाद करो ।
प्राणायाम भी नित्य करो व , तन को अपना स्वस्थ रखो।।
इन कर्म के साथ - साथ में , सदाचरण भी करना है ।।3।।
अच्छे बुरे ......
लोभ, मोह व काम क्रोध ये , आते जाते रहता है ।
जो सच्चे साधक हैं वह तो , इनको वश में रखता है ।।
खानपान गर उत्तेजक तो , ये सब हमें सताता है ।
जैसे खाते अन्न हैं वैसा , मन अपना बनाता जाता है ।।
सात्विक शाकाहारी बनो तुम , मांसाहार न करना है ।।4।।
अच्छे बुरे .........
💐💐💐💐💐💐
© ऋतुराज "बसंत"
अभनपुर, वार्ड नंबर 10, जिला - रायपुर (छत्तीसगढ़)
93409 56001
--------------
: परिचय :
• नाम - बसंत कुमार साहू
• उपनाम - "ऋतुराज " बसंत
• जन्म तिथि - 03/04/1971
• पिता का नाम - हरखूराम साहू
• माता का नाम - राधिका बाई
• शिक्षा - स्नातक , पी. एम. ओ.
• व्यवसाय - कुटीर उद्योग
. पता - अभनपुर,वार्ड नंबर 10,जिला -रायपुर ( छत्तीसगढ़ )
• मोबाइल नंबर - 9340956001
• जीवन क्रम - जन्म से छः माह पूर्व पिता व तीन माह की आयु उपरांत माता द्वारा त्याग , परवरिश ननिहाल में हुआ । दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई नियमित छात्र के रूप में मजदूरी करते हुए पूरा हुआ । तत्पश्चात 12वी , स्नातक ( स्वाध्यायी छात्र ) व आई. टी. आई. की पढ़ाई स्वयं की व्यवसाय ट्रेन व बाजारों में चना बेचते हुए संपन्न हुआ ।
• कविता लेखन का उद्देश्य - सन 1993 को गायत्री परिवार व साधनात्मक गतिविधि में शामिल होने के पश्चात समाज और संगठन में व्याप्त बिखराव , नशा, फैशन , कुरीतिया , षड्विकार जैसे बुराइयों से अवगत होकर उनके प्रति जन सामान्य को सजग करना ।
• प्रेरणा स्त्रोत - अखंड ज्योति , युग निर्माण पत्रिका , आध्यात्मिक अनुभूति और स्व प्रेरणा।
• रचना के प्रकार - आध्यात्मिक , देशभक्ति तथा प्रेरक गीत ।
• भाषा - हिंदी और छत्तीसगढ़ी ( तत्भव और तत्सम शब्दों का समावेश )
---------------------------------------------------------------------------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363

.jpeg)
No comments:
Post a Comment