(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")
वंदेमातरम मातरम वंदे,
भारत वंदेमातरम जय वंदे,
जग-जननी सुधरणीम वंदे,
विश्व जननी सुख दायिनी वंदे।।
सामाजिक समरस वाहिनी,
प्रकृति परितोषिनी भूषणी,
स्वदेशीय सानुराग संधायिनी,
नागरिक कर्तव्य बोध प्रदायिनी,
विश्व बंधुत्व पारिवारिक पोषणी,
वंदे, वंदे, वंदे भू-मातरम वंदे ।।
कोटि कोटि कंठों से गूंजे वंदेमातरम,
जन गण मन की वाणी है माँ तुझे प्रणाम,
स्वतंत्रता सेनानियों का मंत्र यह वंदेमातरम,
स्वराष्ट्रभक्तों का स्वाभिमानी तंत्र वंदेमातरम,
विकसित भारत का प्रेरणायंत्र यह वंदेमातरम,
वंदे वंदे वंदेमातरम जय भारत वंदेमातरम ।।
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जय हो विजय हो भारत माँ की पुत्रियों,
देश को गर्व है तुम पर प्रणाम लाडलियों,
यह देश वह देश है नारियां सब पर भारी है,
वह वीर नारी झांसी वाली व अहिल्याबाई है,
अपरा दुर्गा-रुद्रा-रणचंडी-महाकाली भी है,
खेल क्रिकेट में हरमनप्रीत शेफाली जेमी है।
यह अब अबला नहीं सबला महाबला भी है,
ज्ञान-विज्ञान चंद्रयान के उड़ान में भी यही है,
ऑपरेशन सिंदूर की रणाॅगना भी नारी ही है,
सुशील-संस्कारी-साहसी-संयमित सक्षम है।
खेल खेला पूरे लगन से मन मगन जतन से,
पग पग कई उतार-चढ़ाव पार किया साहस से,
होश ना खोया जोश ना छोड़ा हरदम मैदान से,
हर-मन-प्रीत बनाए रखा जीत देश की दिल से ।
नाज़ है तुमपर सरताज भारत माँ की लाडलियों,
देश का बच्चा बच्चा प्रणाम करता तुम्हें लड़कियों,
दुनिया में भारत का परचम लहराया सुधीर नारियों,
जय हो, विजय हो भारत माँ की प्यारी न्यारी पुत्रियों।
अरे कौन कहता वह उल्लू भारत में नारी का मान नहीं,
बदनाम कर रख दिया इतिहास में नारी का सम्मान नहीं,
धर-गृहस्थी में व्यस्त,सुस्त कर कहा यहां कोई वजूद नहीं,
चार-दिवारी में बंदी नहीं वह तो भारत माँ की बिंदी है।
वह तो आलोकित प्रज्ज्वलित भारत माँ के माथे की बिंदी है।
भारतीय नारी मेरे भारत माँ के माथे की बिंदी है । माथे की बिंदी है ।।
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© डाॅ जमालपुरकर गंगाधर "गंध"
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