(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "भाव कलश", डॉ अपर्णा चतुर्वेदी के संपादन में)
भारतवासी का अभिमान है हिंदी !
हिंदुस्तान की शान है हिंदी!!
हम करते हैं हर भाषा का सम्मान!
पर हिंदी है ईश्वर का वरदान !!
"हिंदी के बिना मैं गूँगा हूं" कहते हैं महात्मा !
क्योंकि हिंदी ही समस्त भारत की आत्मा !!
अपनी भाषा ही प्रभावशाली विरासत है !
हिंदी ही गणतंत्र, लोकतंत्र की सियासत है !!
संस्कृत की लाडली बेटी है हिंदी !
संस्कृति की आन तथा पहचान है हिंदी !!
हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति है !
हिंदी ही देश की भक्ति एवं शक्ति है!!
ग्रियर्सन कहते हैं, "बोलचाल की महाभाषा है हिंदी!"
भारतेंदु कहते हैं, "राष्ट्रीय एकता की जनभाषा है हिंदी!!"
"हृदय की भाषा है हिंदी", कहते हैं गांधी !
इसी भाषा ने जज़्बातों को एक सूत्र में है बाँधी !!
सरल, सुबोध एवं सशक्त भाषा है हिंदी !
सहेतुक, सशास्त्रीय तथा सुगम्य भाषा है हिंदी !
संभवतः हिंदी दिलों को जोड़ती है, तोड़ती नहीं !
असंभव है पाना ऐसी सुंदर देवनागरी भाषा और कहीं !!
धन्यवाद! जय हिंद!
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© सय्यद क़ासिम अली
हैदराबाद विश्वविद्यालय
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