(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "दिग्दर्शन साहित्य का")
कर्तव्य बताने आते हैं हम, क्यों नहीं अधिकार बताते
कितनी परेशानियां सही उन्होंने क्यों नहीं कभी हम जताते?
दिन खोया , रात खोई, सुख चैन सब खो दिया।
कोड़ी कोड़ी जोड़कर कितना सफल हमें बना दिया।2
हम दुख में हैं, बच्चे सुखी रहे सोचकर सब दुख सहते गए।
अपने बच्चों की खुशियों की खातिर सब अपमान सहते गए।।2
कर्तव्य बताने आते हैं हम ,क्यों नहीं अधिकार बताते
कितनी परेशानियां सही उन्होंने क्यों नहीं कभी हम जताते ?
समय आया अधिकार का , बच्चों के पास व्यस्तता का बहाना था ।
मन में खुशी, लक्ष्य तो बुजुर्गों से दूर जाना था।।
उन वृद्ध आंखों में केवल यादों का खजाना था,
लेकिन रो कर ही अपनी भावनाओं को हृदय में छुपाना था ।2
कर्तव्य बताने आते हैं हम क्यों नहीं अधिकार बताते
कितनी परेशानियां सही उन्होंने क्यों नहीं कभी हम जताते ?
झूठे दिखावे और भौतिकता को त्यागे हम,
अपनी ही संस्कृति के संस्कारों को अपना ले हम।
दे मान सम्मान वह उनको जिनके है वे अधिकारी,
यही तो है हमारी संस्कृति की रीत न्यारी।।2
कर्तव्य बताने आते हैं हम क्यों नहीं अधिकार बताते
कितनी परेशानियां सही उन्होंने क्यों नहीं कभी हम जताते?
आओ कसम खा ले हम, वृद्धों को गले लगा ले हम।
जीवन सफल बना ले हम ,ईश्वर को साक्षात् पा लें हम।।2
कर्तव्य बताने आते हैं हम क्यों नहीं अधिकार बताते।
कितनी परेशानियां सही उन्होंने क्यों नहीं कभी हम जताते?
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© डॉ कमलेश कुमारी
सहायक प्राध्यापक( हिंदी)
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