(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "कृतज्ञता कलम को")
बढ़ते जाओ-बढ़ते जाओ,
आगे -आगे बढ़ते जाओ।
बढ़ना है तो लड़ते जाओ,
बचपन से ही सब कुछ सहते जाओ।
करते जाओ- करते जाओ,
सदा कोशिश करते जाओ।
हार न मानो तुम,आगे ही बढ़ते जाओ,
अपने सपनों को सच करते जाओ।
हार-जीत में थोड़ा-सा अंतर,
मन में लता परिवर्तन बेहतर।
कुछ काम नया तुम करके दिखाओ,
सफलता का जीवन फल पाओ।
माता - पिता को भार न बनो तुम,
इस दुनिया को ही आधार बनो तुम।
निराधार ही खड़े हो जाओ,
सबको तुम ही आधार बन पाओ।
जीते जाओ - जीते जाओ,
जीवन पथ में जीते जाओ।
मानव जीवन मिला है,सार्थक बनाओ,
इस दुनिया में अपना पहचान बनाओ।
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© Botla Sirisha
Government High school
Alamuru
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