Friday, November 14

शब्द - पल्लवी पंडा (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")



    शब्द 
💐................💐


शब्द जीवित होते हैं 

      कभी उपन्यासों में 

      कभी कहानियों में 

      कभी कविताओं में 

सच में ….

शब्द जीवित होते हैं

एक जीवित मनुष्य की तरह 

      कभी सन्नाटो में 

      कभी बच्चों के किलकारियों में

      कभी एक दुःखी नारी की रोदन में

 सच में …..

शब्द जीवित होते हैं

      कभी झरना के कल कल नाद में

      कभी समंदर की गर्जन में

      कभी हवा के सरसराहट में

      कभी बारिश की रिमझिम में

 सच में…..

 शब्द जीवित होते हैं 

      कभी अंतरात्मा में भरी एक महान विस्फोट में 

सच में…..

       शब्द जीवित होते हैं


💐💐💐💐💐💐

© पल्लवी पंडा 

शोधार्थी  
रमादेवी महिला विश्वविद्यालय 
भुवनेश्वर ओड़िशा

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Wednesday, November 12

असफलता एक अभिशाप - कवि देवशंकर त्रिपाठी जी (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")



    असफलता एक अभिशाप
💐.................................................💐


यदि विफल बना तू जीवन में 

फिर पथ तेरा दुर्गम होगा।

जीवन से खुशियां जाएंगी,

जीवन भर ग़म ही ग़म होगा।।


ओछे भी तुझ पर थूकेंगे, 

कहने से कुछ न चूकेंगे।

जब गरल पीएगा निंदा की,

तब ओज तेरा बस कम होगा ।।


तू हाय-हाय चिल्लाएगा,

सोचो वह कैसा पल होगा।

यदि बना रहा अब भी जड़मत,

फिर कैसा तेरा कल होगा ।।


इस जग की यह है परंपरा ,

असफल धिक्कारे जाते हैं।

निर अपराधी निर्दोष रहे,

फिर भी वह मारे जाते हैं।।


वह क्रंदनीय जग निन्दनीय,

जीवन की यही कहानी है।

जो बना रहा निर्बल सदैव,

फिर सोचनीय वह प्रानी है।।


इसलिए सुनो हे प्रणवीरों,

अपना तो बस यह बाना हैं।

कुछ बड़ा करेंगे जीवन में ,

मन ही मन हमने ठाना है ।।


यदि साथ रहे श्रीराम मेरे,

गौरी शंकर हनुमान मेरे।

तो अपने कल में दम होगा,

यदि चाहेंगे श्रीराम मेरे,

तो नहीं किसी से कम होगा।।


💐💐💐💐💐💐

© कवि देवशंकर त्रिपाठी जी

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Saturday, November 8

“नारी का नव रूप” - तज़ीन शरीफ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")





    “नारी का नव रूप”
💐.......................................💐


वो नारी अब अबला नहीं,

संघर्षों से घबराने वाली नहीं।

हिम्मत उसकी पहचान बनी,

हर राह में मुस्कान बनी।

कभी माँ, कभी बेटी प्यारी,

कभी बन जाए जग की अधिकारी।

अपने दम पर आगे बढ़ती,

हर मुश्किल से लड़ती-पढ़ती।

अब नहीं उसे सहारे की आस,

खुद रचती है अपना विश्वास।

कर्म ही उसका धर्म महान,

देश की शान, समाज की जान।

हाथों में कलम, आँखों में नूर,

बदल रही वो हर एक दस्तूर।

जो कल थी बस कहानी में,

आज है वो अग्रिम पंक्ति में।

नारी अब न झुकेगी, न थमेगी,

हर कदम पर दुनिया को दिखेगी।

आत्मनिर्भर, साहसी, निडर —

भारत की नारी अब है बेहतर।


💐💐💐💐💐💐

© तज़ीन शरीफ

C M R University 

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Wednesday, October 29

नारी निर्वहन - डॉ. आनन्द कटारे ‘बुंदेली‘ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")



    नारी निर्वहन
💐................................💐


परंपराओं का निर्वहन करती है नारी 

लंबी उम्र का विश्वास दिलाता है नारी 

अपना शहर छोड़ कर तुम्हारे घर को रोशन करती है नारी 

चिर सनातन धर्म का अखंड अखंड कीर्तन करती है नारी

सोलह सिंगार करके नारी चलनी से दीदार करती है नारी

निर्जला व्रत रखकर पति का ख्याल रखती है नारी 

पति-पत्नी के बंधन की परंपरा में 

आनंद के गीत गाती है नारी 

खुद को भुलाकर खुद को भुलाकर

ससुराल को स्वर्ग बनाती है नारी 

पीहर के रिश्तों में नया उपवास रखती है नारी 

सामाजिक दायित्व का निर्वहन करती है नारी 

नारी है देवतुल्य रखो तुम उसका ख्याल 

खुद करवां बनकर खुद करवां बनकर

पति की यात्रा में जीवन भर संग निभाती है नारी  

आधुनिकता के इस दौर में चांद में चांद का दीदार करती है नारी


💐💐💐💐💐💐

© डॉ. आनन्द कटारे ‘बुंदेली‘

सहायक आचार्य 

बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, झॉसी (उ.प्र.)

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Tuesday, October 28

मेरे सपनों का भारत - डॉ. इंदु .पी (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")



    मेरे सपनों का भारत
💐............................................💐


अरमान है यह मेरा ,

सपनों का एक भारत बने ।

भूखे को खाना हो, नंगे को कपड़ा मिले ,

पक्की छत का एक बसेरा,

हर जन का अधिकार रहे।


राग , द्वेष की भावना से परे ,

संस्कृति का एक दीपक जले  ।

खुले आसमान सी आजादी हो,

धर्म , रंग , जाति का भेद न पले ।

युवाओं के इंद्रधनुषी अरमानों का ,

देश मेरा तू कल्पवृक्ष बने ।


नैतिकता और शांति की तू 

सदा धवल ध्वज बने,

देश भक्ति और साहस का तू

सदा नया उद्गार गढ़े। 

समृद्धि ,वैभव ,आत्मनिर्भरता की ,

तू एक नई मिसाल बने,

प्रतीक बने तू विश्व शांति का ,

सोने की चिड़िया बन तू ,

एक नया इतिहास रचे ।


स्वतंत्रता की इस उजले गगन में,

मैं देखूं स्वर्णिम भारत के सपने।

जहां नारी का सम्मान रहे ,

जहां समानता की मीठी धारा बहे ।

जहां भ्रष्टाचार नहीं पारदर्शिता सधे

जहां बच्चा-बच्चा स्वस्थ और शिक्षित बढ़े,

जहां हर नागरिक देश की सेवा करें।


यही एक सपना मन को भाए ,

ना बटे इंसान , ना रहे भय के साए ।

शिक्षा का दीपक चहु ओर जले,

न्याय पूर्ण मानवीयता की धरोहर लिए,

आओ …आओ ऐसे भारत की कल्पना करें ,


हर गली हर चौबारे पर ,

हर इंसान के हृदय स्तंभ पर ,

एक ही नारा, एक ही शोर उठे ,


जय जननी जय भारत भूमि ,

जय विश्व तरंगिणी जय शांति स्वरूपिणी ,

जन गण मन में तेरी सदा ,

शौर्य की जय जयकार रहे, 

शौर्य की जय जयकार रहे।।


जय हिंद ! जय भारत!

💐💐💐💐💐💐

© डॉ. इंदु .पी


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Thursday, October 9

रिटायरमेंट का मज़ा - ज्ञान रंजन (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "साहित्य सौरभ")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "साहित्य सौरभ")





    रिटायरमेंट का मज़ा
💐............................................💐


अब एक क्षण भी बेकार न जाने देंगे,

मुस्कुराकर हर दिन बिताएँगे।

रिटायरमेंट में खाली बैठने का मजा ही कुछ और है।


बीते साल कभी लौटकर न आएँगे,

छूटे सहकर्मी भी वापस न मिल पाएँगे।

रिटायरमेंट में यादों के संग मुस्कुराने का मजा ही कुछ और है।


ना सुबह जल्दी उठने की झंझट,

ना रात को नींद की मजबूरी।

मीठा संगीत सुनेंगे आराम से,

रिटायरमेंट में चैन से सोने का मजा ही कुछ और है।


तन को स्वस्थ रखने को योग ज़रूरी,

मन को हँसाने को हँसी ज़रूरी।

अब आराम फरमाने का अधिकार है,

रिटायरमेंट में तन-मन सँवारने का मजा ही कुछ और है।


कभी सिक लीव लेकर अपनों संग रहे,

कभी छुट्टी को तरसते ही रहे।

अब मुक्ति है, अब छूट है,

रिटायरमेंट में जीवन जीने का मजा ही कुछ और है।


कभी शराफ़त, कभी ट्रांसफर का डर,

मन की बातें रह गईं अंदर ही अंदर।

अब लिखेंगे, अब कहेंगे,

रिटायरमेंट में मन खोलने का मजा ही कुछ और है।

💐💐💐💐💐💐

© ज्ञान रंजन

मेल एक्सप्रेस ट्रेन मैनेजर, तिरुपति

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Monday, October 6

The People Who love the stillness - Ms Sharmitha Tom (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "Sahitya Saurabh")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "Sahitya Saurabh")



    The People Who love the stillness
💐...............................................................................💐


Ho!  I share a life with people

Who love stillness and silence.

No spoken words bridge the gap between us

No cues , smile to admit I am visible


My energy, happiness and hope 

gain in conversation

Theirs from silence and stillness.

One sitting in the veranda stares at sky 

Unmovable like rock and

unnoticeable like lizard

The other in my home, sits

On the blue sofa , gulfed in the sea of thoughts

Like an antique piece of home décor


Though they don't, I watch them

Like a lucky birdwatcher 

With birds here, glued to past 

Unmoveable-


In this home, they say boredom

Has lost its meaning;

But I feel the misty smoke of boredom

That causes an intangible pain.


💐💐💐💐💐💐

© Ms Sharmitha Tom 

Kerala

--------------------

Authors Profile

    Ms Sharmitha Tom is a writer, literature enthusiast, and Assistant Professor of English Literature, currently pursuing her PhD in English Literature with a focus on Disability Studies, Women’s Writing, and Gender Studies. Based in Kerala, India, and a lover of books and nature, her writing is often rooted in quiet emotions and unspoken thoughts.

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Understand The Arjun’s Dream - K Rakesh (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "Shabdarambh")

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