(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")
शब्द जीवित होते हैं
कभी उपन्यासों में
कभी कहानियों में
कभी कविताओं में
सच में ….
शब्द जीवित होते हैं
एक जीवित मनुष्य की तरह
कभी सन्नाटो में
कभी बच्चों के किलकारियों में
कभी एक दुःखी नारी की रोदन में
सच में …..
शब्द जीवित होते हैं
कभी झरना के कल कल नाद में
कभी समंदर की गर्जन में
कभी हवा के सरसराहट में
कभी बारिश की रिमझिम में
सच में…..
शब्द जीवित होते हैं
कभी अंतरात्मा में भरी एक महान विस्फोट में
सच में…..
शब्द जीवित होते हैं
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© पल्लवी पंडा
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