(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")
यदि विफल बना तू जीवन में
फिर पथ तेरा दुर्गम होगा।
जीवन से खुशियां जाएंगी,
जीवन भर ग़म ही ग़म होगा।।
ओछे भी तुझ पर थूकेंगे,
कहने से कुछ न चूकेंगे।
जब गरल पीएगा निंदा की,
तब ओज तेरा बस कम होगा ।।
तू हाय-हाय चिल्लाएगा,
सोचो वह कैसा पल होगा।
यदि बना रहा अब भी जड़मत,
फिर कैसा तेरा कल होगा ।।
इस जग की यह है परंपरा ,
असफल धिक्कारे जाते हैं।
निर अपराधी निर्दोष रहे,
फिर भी वह मारे जाते हैं।।
वह क्रंदनीय जग निन्दनीय,
जीवन की यही कहानी है।
जो बना रहा निर्बल सदैव,
फिर सोचनीय वह प्रानी है।।
इसलिए सुनो हे प्रणवीरों,
अपना तो बस यह बाना हैं।
कुछ बड़ा करेंगे जीवन में ,
मन ही मन हमने ठाना है ।।
यदि साथ रहे श्रीराम मेरे,
गौरी शंकर हनुमान मेरे।
तो अपने कल में दम होगा,
यदि चाहेंगे श्रीराम मेरे,
तो नहीं किसी से कम होगा।।
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© कवि देवशंकर त्रिपाठी जी
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