(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "खुबसूरत लम्हें")
अरमान है यह मेरा ,
सपनों का एक भारत बने ।
भूखे को खाना हो, नंगे को कपड़ा मिले ,
पक्की छत का एक बसेरा,
हर जन का अधिकार रहे।
राग , द्वेष की भावना से परे ,
संस्कृति का एक दीपक जले ।
खुले आसमान सी आजादी हो,
धर्म , रंग , जाति का भेद न पले ।
युवाओं के इंद्रधनुषी अरमानों का ,
देश मेरा तू कल्पवृक्ष बने ।
नैतिकता और शांति की तू
सदा धवल ध्वज बने,
देश भक्ति और साहस का तू
सदा नया उद्गार गढ़े।
समृद्धि ,वैभव ,आत्मनिर्भरता की ,
तू एक नई मिसाल बने,
प्रतीक बने तू विश्व शांति का ,
सोने की चिड़िया बन तू ,
एक नया इतिहास रचे ।
स्वतंत्रता की इस उजले गगन में,
मैं देखूं स्वर्णिम भारत के सपने।
जहां नारी का सम्मान रहे ,
जहां समानता की मीठी धारा बहे ।
जहां भ्रष्टाचार नहीं पारदर्शिता सधे
जहां बच्चा-बच्चा स्वस्थ और शिक्षित बढ़े,
जहां हर नागरिक देश की सेवा करें।
यही एक सपना मन को भाए ,
ना बटे इंसान , ना रहे भय के साए ।
शिक्षा का दीपक चहु ओर जले,
न्याय पूर्ण मानवीयता की धरोहर लिए,
आओ …आओ ऐसे भारत की कल्पना करें ,
हर गली हर चौबारे पर ,
हर इंसान के हृदय स्तंभ पर ,
एक ही नारा, एक ही शोर उठे ,
जय जननी जय भारत भूमि ,
जय विश्व तरंगिणी जय शांति स्वरूपिणी ,
जन गण मन में तेरी सदा ,
शौर्य की जय जयकार रहे,
शौर्य की जय जयकार रहे।।
जय हिंद ! जय भारत!
💐💐💐💐💐💐
© डॉ. इंदु .पी
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