(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *कम्पन शब्दों का* साझा संकलन से)
झुलस रहा नित स्वारथ में जग,इन पर भी तो ध्यान दें ।
अगर बनाना श्रेष्ठ विश्व को, इनको हम सद्ज्ञान दें ।।
शब्द नाद है शब्द ब्रह्म है, शब्दों से संसार है ।
इन शब्दों के ही कारण , बनता एक परिवार है ।।
मधुर वचन कहते हैं उनको, आओ हम सम्मान दें ।।१।।
अगर बनाना श्रेष्ठ विश्व को,,,,,,,,,,
रत्नावली के शब्दों ने तो, तुलसीदास को जन्म दिये ।
किंतु द्रौपदी अंधे कहकर, महाभारत भी रचा दिये ।।
शब्द शक्ति तो महाशक्ति है, देता एक परिणाम ये ।।२।।
अगर बनाना श्रेष्ठ विश्व को,,,,,,,
भाई-भाई का नहीं रहे सब, स्वारथ में ही जी रहे ।
विषय वासना के चंगुल में, आज युवा है बिगड़ रहे ।।
नवपीढ़ीयों को समझाएं कि,निज चरित्र पर ध्यान दें ।।३।।
अगर बनाना श्रेष्ठ विश्व को,,,,,,,
अगर कवि अथवा हो लेखक, पत्रकार तो ध्यान दें ।
वही लेखनी लिखकर जाना, बातें जग कल्याण के ।।
आज मीडिया धर्मगुरु सब, रहबर हैं ये जहान के ।।४।।
अगर बनाना श्रेष्ठ विश्व को,,,,,,,
💐💐💐💐💐💐
© बसंत कुमार साहू "ऋतुराज"
अभनपुर
90090 93831
----------------------------------------------------------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363

.jpeg)
No comments:
Post a Comment