(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *डॉ.सुषमा सिंह* कृत साझा संकलन *कम्पन शब्दों का* )
हां मुझे प्यार है, नीले ऊंचे आकाश से
जो ऊंचाइयों को छूने की, मुझको प्रेरणा देता है ।
सूर्य की रश्मियों से
जो अपना प्रकाश से मेरे जीवन में तेज भरती हैं।
चांदनी से
जो अपनी शीतलता का गुण मुझमें भरती है।
संगीत से
जो प्रकृति के कण-कण में बसा है ।
उड़ते पंछियों से
जो उड़ान भरते हुए आगे बढ़ने का हौंसला देते हैं।
पेड़ पौधों से
जो फल शाक फूल और छत्र छाया देकर
हमारा जीवन का आधार बनते हैं।
गौ माता से
जिसे मेरे कन्हैया प्रेम करते हैं,
और मां की तरह जो हमारा भरण पोषण करती है ।
अपने भारत देश की उस पावन माटी से
जहां हमारे प्रभु और ऋषि मुनियों ने जन्म लिया और
जिस माटी में खेलकर हम बड़े हुए ।
हां मुझे प्यार है उन सबसे जो
मेरी गलतियों को अनदेखा कर मेरी खुशी के साझेदार होते हैं
और स्वस्थ रहकर आगे बढ़ते रहने का आशीर्वाद देते हैं।
हे परमेश्वर इन सबके बिना जीवन नश्वर है,
जब तक मेरी सांसें हैं मुझे इनसे प्यार रहेगा।
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© संगीता अग्रवाल
आगरा
मो.9719102232
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