गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित कृत साझा संकलन "कम्पन शब्दों का"
इंसान का सौंदर्य है इंसानियत
व मानवता सबके दुख को समझना
सबके प्रति दया भावना रखना
करुणा प्रेम अपनापन रखना
इंसानियत व मानवता है
इंसान इंसान के काम आता है
आदमी तो बहुत कुछ चाहता है
पर परिस्थितियों अनुकूल नहीं होती है
निकट परिस्थितियों में यदि हम गंभीर रहे
व आशा उम्मीद विश्वास रखें
तो धीरे-धीरे परिस्थितियों अनुकूल हो जाती है
चाह तो राह है
इस जीवन को
बेदाग निर्मल सहज सौंदर्य पूर्ण व उत्तम बनाना है
उत्तम विचारों से जीवन सुख में होता है
डर भय चिंता रोग शोक अभिमान बुराई बदनाम भी
झूठ पाप से दूर रहकर अच्छे कर्म करना है
निंदा आलस लापरवाही व अंधविश्वास को
त्याग कर वह तरना से दूर रहना है
जुल्म करने वाला वह जुल्म सहने वाला भी पापी है
जियो और जीने दो यही इंसानियत है।
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शशि पाण्डेय
86021 12515
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