गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *अरविंद सिंह चौहान'* कृत साझा संकलन "स्वराभिषेक विचारों का"
जीवन में फिर नव प्रकाश हो, ऐसा दीप जलाएँगे।
विश्वगुरु बन जाये भारत, अपना फर्ज निभाएँगे।।
संस्कार के पुष्पों से ही, देश हमें महकाना है।
भेदभाव के चिह्न नहीं हों, सबको खूब पढ़ाना है।
जहाँ ज्ञान है वहीं शांति है, यह विश्वास जगाएँगे।
विश्वगुरु बन जाये भारत, अपना फर्ज निभाएँगे।।
यदि कर्तव्यों से भागेंगे मिल पायेगा सम्मान नहीं।
चाहे जितना जोर लगा लें होगा फिर कल्याण नही।
कर्म हमारी पूजा है अंतस में भाव जगाएँगे।
विश्वगुरु बन जाये भारत, अपना फर्ज निभाएँगे।।
जिसमें अपना तेज नहीं, वह मूल्यहीन हो जाता।
भाग गया जो पथ से अपने, अंतकाल पछताता।
करके 'प्रीत' निवेदन सबसे निज सम्मान बचाएँगे।
विश्वगुरु बन जाये भारत, अपना फर्ज निभाएँगे।।
💐💐💐💐💐💐
प्रीति श्रीवास्तव 'प्रीत'
शिक्षिका
झाँसी
94159 89233
----------------------------------------------------------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363

.jpeg)
No comments:
Post a Comment