(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *डॉ.सुषमा सिंह* कृत साझा संकलन "स्वराभिषेक विचारों का" )
आ गया नववर्ष लेकर
फिर नई संभावनाएं।
सोचती हूंँ दूर होंगी
झूठ की अवधारणाएंँ।।
मन मुदित करके उठेंगीं
प्रातः की वह नवल ज्योति,
मन की गांठे खोल दूंँगी
बांधकर संकल्प शक्ति,
आत्मा को अब न दूंगी
मैं विषैली यातनाएं।
आ गया नववर्ष से लेकर
फिर नई संभावनाएंँ।।
ओढ़कर चादर खुशी की
खिलखिलाहट को बिखेरूं,
प्रीति की बांधूं गठरिया
स्वयं फिर खुद को सहेजूं,
भेज दूँ निर्मल हृदय से
भावमय शुभकामनाएं।
आ गया नववर्ष से लेकर
फिर नई संभावनाएं।।
आज आओ दिव्य शक्ति से
नए संवाद कर लूं,
वह हरे संताप जन का
ऐसी कुछ फरियाद कर लूंँ,
पंख जुल्मों के कतर कर
दूर हों सब आपदाएं।
आ गया नववर्ष लेकर
फिर नई संभावनाएं।।
बेटियों की अस्मतों से
ना दरिंदे खेल पाएंँ ,
महकते उपवन की खुशबू
से फिजाएंँ महक जाएंँ,
गुनगुनाती धूप में अब
स्वर हवाएं गुनगुनाएँ।
आ गया नववर्ष लेकर
फिर नई संभावनाएंँ।।
सोचती हिंदी की बिंदी को सुशोभित बाल मेरे,
जयति जय मां भारती
गाऐं सभी संध्या सवेरे,
गान वंदे मातरम हो
ध्वनित हों सद्भावनाऐं ।
आ गया नववर्ष लेकर
फिर नई संभावनाएंँ ।
सोचती हूंँ दूर होंगी
झूठ की अवधारणाएंँ।।
💐💐💐💐💐💐
© यशोधरा यादव 'यशो'
आगरा
8958943278
--------------------------------------------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363

.jpeg)
No comments:
Post a Comment