(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन " स्वराभिषेक विचारों का " )
गंगा
मेरा नाम हैं गंगा,
मै भारतीय संस्कृति की पहचान,
प्रगट करू क्या मैं अपनी दुःख,
मर रही हूं मैं बार-बार,
खो रही हूं मैं अपनी जल की मिठास,
भौतिक पदार्थों ने किया है मुझे बर्बाद,
मेरे ऊपर बांध बना दिया गया है,
मेरे जल को प्रदूषित कर आज,
मानव अपने पापों को धो रहा है,
पर मानव ने हमसे ये नहीं सीखा,
कठोर परिश्रम ओर सहज स्वभाव,
नदियों के जल से हैं मिलता,
लोगों को देती है जीवन दायिनी,
गंगा जल होती है कृपा आधारणीय,
सुरक्षित रखती है मानव जीवन धारा,
पर गंगा मैली हो गई है आज,
गन्दगी सहन करते बूढी हो गई,
गंगा अब मानव से मैली हो गई,
जन जन तक यह बात बताना है,
गन्दगी अब नहीं फैलायेंगे,
गंगा मां को स्वच्छ हम बनायेंगे,
मेरा नाम हैं गंगा,
मैं भारतीय संस्कृति की पहचान
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गंगा शरण पासी
रायपुर
79872 28779
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गंगा शरण पासी
व्याख्याता
शा उ मा वि पथरी सिलयारी
योग्यता एम ए बीएड
जन्म तिथि 9.9.1969
रुचि लेखन कार्य,बागनानी, काव्य पाठ करना, लोगों को जागरूक करना, समाज सेवा करना।
सम्मान उत्कृष्ट नारी सम्मान, राष्ट्रीय निर्माता सम्मान, भारत की श्रेष्ठ शिक्षिका सम्मान, संघर्ष शील नारी सम्मान,पढ ई तुहर द्वार सम्मान,कोरोना योद्धा सम्मान, अन्तर्राष्ट्रीय महिला सम्मान, अन्तर्राष्ट्रीय मैत्री गोल्डन सम्मान, राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मान, राष्ट्रीय साहित्य कला सम्मान, राष्ट्रीय शिक्षिका सम्मान, जागरूक नारी सम्मान,कराटे फाइटर सम्मान आदि
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GEETA PRAKASHAN
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