(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *श्रीमती सुमा मंडल* कृत साझा संकलन "शब्दाभिषेक शिव का" )
शिव जी की कृपा बिना, श्री राम जी न मिले।
राम जी की कृपा बिना, भक्ति कमल न खिले।
देवों के देव महादेव कहलाते हैं, बाबा भोलेनाथ ।
रहे नित सिर पर मेरे, बाबा की करूणा का हाथ ।
राम जी मंजिल हैं तो, वहां का मार्ग बाबा भोले।
भक्तों के भव - बंधन की गांठ को बाबा ही खोले।
यदि प्रभु श्री राम जी के चरण मुक्ति का धाम है।
तो वहां तक पहुंचाने का, मेरे बाबा करते काम हैं।
श्री हरि और हर का अनोखा है आपसी नाता।
शब्दों में भला कैसे इसको बयां है किया जाता?
मन तो बस मेरा आनंद सागर में गोता लगाता है।
निरख-निरख के प्रेम उनके, स्वयं को जगाता है।
शिवजी जपते हैं नित राम,करें राम जी की पूजा।
श्री राम जी कहे शिव बिना मेरा अराध्य न दूजा।
शिव भक्ति बिना पा सकता नहीं कोई मेरी भक्ति।
मिल सकती नहीं उनको कभी स्वप्न में भी मुक्ति।
बता रही हूं आज मैं सबको रहस्य की बात एक।
कर लीजिए कर्तव्य शिव जी की भक्ति का नेक।
काशी में देह छोड़ते जो,बाबा से राम-नाम पाते हैं।
आवागमन से छूटकर फिर,परम धाम को जाते हैं।
तीनों लोकों के गुरु मेरे बाबा भोले ,हैं दयालु बड़े।
सेवा से जल्दी प्रसन्न हो, दया निज भक्तों पे करें।
समुद्र मंथन में विष पान कर नीलकंठ कहलाए।
हलाहल विष से जलती सृष्टि को बाबा हैं बचाए।
कामदेव के शत्रु बाबा भोलेनाथ मेरे, हैं त्रिपुरारी।
नंदीश्वर कहलाते बाबा, करते हैं नंदी की सवारी।
कैलाश पति, शम्भू, निरंजन,उमापति कई नाम।
मन रे न छोड़ कभी ऐसे सदा शिव के चरण धाम।
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श्रीमती सुमा मण्डल
वार्ड क्रमांक 14 पी व्ही 116
नगर पंचायत पखांजूर
जिला कांकेर छत्तीसगढ़
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