(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "शब्दाभिषेक शिव का" )
देवो के देव शिवशंकर, महादेव ढोकरा देव।
तेरी कृपा अपरंपार, जग में शिव बाबा देव।।
संसार में शांति सत् चरित्र प्रेम, दया वात्सल्य करूणा।
क्यों नहीं लाते हो शिव बाबा, फैला भूखमरी रोगी घृणा।
हजारों लीटर दूध दही, रोज लिंग में डालते हैं।
भूख के कारण लोग, तड़पकर रोज मर जाते हैं।।
लिंग रूप पत्थर को, पुजते पुजते जुग बीत गया।
मंदिर के बाहर बैठे, भिखारी का जीवन बीत गया।।
तेरी कृपा से शिव बाबा, सभी को समानता में लाते।
कोई गरीब ना हमीर, कोई उँच ना नीच होते।।
हे शिवशंकर बाबा जीवन में, कष्ट के मुक्ति दाता हो।
जग में भरा राग द्वेष घृणा, क्यों नहीं हटाने आतें हो।।
आपकी मंदिर में माया, खूब चढ़ावा आती है।
शिक्षा उपचार खान पान, खूब भेदभाव होती है।।
हे शिव बाबा अकेला व्यक्ति, लिंग में कुण्डली मारे बैठे रहता है।
सब के चढ़ावे की माया को, झट से लपेटकर घर ले जाता है।।
प्रकृति के सुन्दर रचना में, जीव जन्तु आराम से विचरण करते हैं।
जग प्रदूषित जहरीले हो गई, मानव लालच के कारण करते हैं।
हे प्रकृति शक्ति शिव बाबा, तेरी कु दृष्टि के प्रभाव से।
अकाल बाढ़ आंधी तुफान, युद्ध महामारी आती है प्रभाव से।
हे शिव बाबा पुरी सृष्टि में, जड़ चेतन का रचना की है।
मानव धतुरा बैल तुलसी पत्र, को चढ़ाने का ढोंग करते है।।
हे शिव बाबा बच्चीयों पर, इज्जत, लुटने से क्यों नहीं बचाते हो।
गिड़गिड़ाई चिल्लाईं होगी, घुस भ्रष्टाचार पर रोक लगाते नहीं हो।।
सुन्दर सृष्टि की रचना, फल फूल कंद मूल धरती में।
अग्नि वायु जल धूप छांव, जीव जन्तु पेड़ पौधे में।।
भूमण्डल जलमण्डल, सौर मण्डल की रचना किये हो।
हे शिव बाबा कौन हो, कैसे हो रूप कैसा है कहाँ रहते हो।।
कोई तो हो जो सूर्य चन्द्रमा, पृथ्वी ग्रह नक्षत्र तारागण।
उल्का पिण्ड आकाशगंगा, तेरे इशारे पर करते हैं निर्माण।।
💐💐💐💐💐💐
© डॉ. जगनाथ बघेल
ग्राम+पोस्ट - नेगानार, विकास खण्ड - दरभा,
व्याहा-तोकापाल, जिला - बस्तर,
राज्य - छत्तीसगढ़ पिन कोड नं.494442
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Wednesday, December 6
जीवन की शक्ति - डॉ. जगनाथ बघेल (गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "यादगार शब्दों का सफर")
(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "यादगार शब्दों का सफर")
जीवन तो छोटा है, कभी नहीं रुकना है।
दृढ़ विश्वास से हमें, निरंतर आगे बढ़ना है।।1।।
समृद्धी के उँचाई पर जाना है, सेवा की तीव्रता को लाना है।
स्वयं पर विश्वास करना है, मन में दुर्बलता नहीं लाना है।।2।।
परम आवश्यक है, शक्ति को जागृत करना।
निर्थक बातें छोड़कर, तीव्रता से आगे बढ़ना।।3।।
जीवन में महान काम करना है, उठो जागो और आगे बढ़ना है।
दुनिया आगे बढ़ रही है, कुएं की मेंढक की तरह रहना छोड़ना है।।4।।
दृढ़ संकल्प लेकर, समाज की भलाई के लिए काम करना है।
सहानुभूति बनकर, जीवन में दुर्बल मनुष्य की सहायता करना है।।5।।
स्वार्थ यश कीर्ति छोड़कर, किसी से आशा ज्यादा नहीं रखना है।
सूर्य के प्रकाश की तरह बनकर, डरना नहीं उजाला फैलाना है।।6।।
अपनी निष्ठाओं से दृढ़ रहकर, समाज में महान कार्य करना है।
लोग स्वान की तरह भौंकते रहेंगे, अदम्य ऊर्जा की शक्ति से बढ़ना है।।7।।
ईर्ष्या सदा के लिए छोड़ना है, जीवन में शक्ति अर्जित करना है।
पवित्रता को कम नहीं करना है, समाज में प्रेम की शक्ति को लाना है।।8।।
प्रेम की गुणों का विस्तार ही जीवन है, गुणों की शक्ति क्षय ही मृत्यु है।
परोपकार का काम करना ही जीवन है, दुसरे को कष्ट देना ही पाप है।।9।।
समाज की उत्थान के लिए मन में दर्द हो, हृदय की धड़कन दुःख को महसूस करता हो।
तो हजारों कठिनाईयों को छोड़कर, गरीब दुःखीयों के लिए काम करता हो।।10।।
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© डॉ. जगनाथ बघेल
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व्याहा-तोकापाल, जिला - बस्तर,
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