(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "कलम मेरी पहचान")
समाज में शक्ति का संचार करना,तन मन वाणी को अर्पित कर।
समाज सेवा को परम सेवा समझना, अपने कर्तव्य का पालन कर।।
रोटी मुझे कोई नहीं देगा, कुद को परिश्रम करना है।
मुझे बहुत काम करना है, स्वर्ग जैसे सुख प्राप्त करना है।।
समाज की सेवा करने के लिए, मन में ठग को आने से रोकना है।
समाज में निरक्षर गरीब दुःखी है, धर्म समझकर काम करना है।।
निर्धनों को लुटकर धन कमाया, समाज सेवा करने लायक नहीं है।
समाज के लिए कुछ नहीं किया, वे असभ्य और घृणा के पात्र हैं।।
उँचाइयों को पाने की चेष्टा करना है, तन मन से कार्य में लग जाना है।
जब तक सफलता नहीं मिलती है, मंजिल को प्राप्त करने में लग जाना है।।
मन में दुर्बलता का बोध है, तो हम कुछ नहीं कर सकते हैं।
मन में इच्छा शक्ति पवित्रता है, तो सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं।।
जो पवित्र तथा साहसी है, समाज में सब कुछ कर सकता है।
काम शुरू करने से डरता है,वह बड़ा काम नहीं कर सकता है।।
शक्तियों को एकत्रित करता है, ईश्या अंहकार को छोड़ता है।
संगठित रहकर कार्य करता है, यही सफलता का रहस्य हैं।।
वीरता शक्ति से आगे बढ़ना, अनन्त धैर्य बनाए रखना।
अपने कार्य पर अटल रहना, निश्चित है सफलता मिलना।।
अपने आलस्य को त्यागना, कुद को उन्नत बनना है।
स्वयं में विजय प्राप्त करना, खूब शक्तिशाली बनना है।।
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© डॉ. जगनाथ बघेल
ग्राम+पोस्ट - नेगानार, विकास खण्ड - दरभा,
व्याहा-तोकापाल, जिला - बस्तर,
राज्य - छत्तीसगढ़ पिन कोड नं.494442
94076 41262
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