(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *स्वराभिषेक विचारों का* साझा संकलन से)
देखी मैं ने एक लड़की
पीली कपड़ों वाली ।
बैठी थी घर की आँगन में ,,,,
दिख रही थी,,,
कुछ व्यतीत
अपने उम्र से ज़्यादा चिंतित ।
घर तो टूटी फूटी थी
आँगन तो नाम मात्र रहे ।
सुबह के भाग-दौड़ के बीच,,,
व्याकुल चेहरे साथ बैठी हुई
पीली कपड़ोंवाली लड़की,,,
शायद,,
आँगन में बैठ भविष्य की और झांग रही होगी,,,
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© कन्नगी
वन्दना टी के
92075 52408
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हिन्दी आधुनिक कविता के युग में समकालीन विषय पर कविता लिखने वाले कवयित्रीयों में से एक है कन्नगी उनकी असली नाम वन्दना टी के है। जन्म केरल के कोट्टयम करुकचाल में हुआ था । माता का नाम सिन्धु मोल टी एम
पिता का नाम कण्णन टी ए
महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय में हिन्दी में पी एच.डी. कर रही है । अपनी उच्च शिक्षा श्री शंकराचार्य विश्वविद्यालय, कालडी और महात्मा गांधी विश्वविद्यालय से प्राप्त की ।
अपनी पढ़ाई के दौरान लेखन की शुरुआत किया ।
प्रकाशन : जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन
कविता संकलन : सुर सरिता, उड़ान हमारे कलम की, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी आदि ।
सम्मान / पुरस्कार :
●मीराबाई साहित्य रत्न पुरस्कार
●पूर्णोदय रत्न सम्मान
●आधुनिक मीरा सम्मान
● ओजस्विनी नारी सम्मान
●लोकप्रिया सम्मान 2023
●हिन्दी गौरव सम्मान 2023
●मातृभाषा सम्मान
पद तथा दायित्व : कविताओं के लहर में उलझे रहनेवाली एक कवयित्री ।
बच्चों को भविष्य की ओर ले जानेवाली एक अध्यापिका ।
अन्य : अनेकों काव्यपाठ , कई मंचो पर प्रतिभागिता,काव्य गोष्ठीयों में सहभागिता ।
ऑनलाइन काव्य पाठ हेतु साहित्यिक मंचों द्वारा सम्मान ।
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