(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *स्वराभिषेक विचारों का* साझा संकलन से)
देख सुबह की पहली किरण, मन में काफी उल्लास था।
बुझा दूंगी पेट की ज्वाला, यही पहला प्रयास था।।
निकली चिड़िया कोटर से, अपनी भूख मिटाने।
ढूंढ रही थी चारों ओर, अन्न के कुछ दाने ।।
पहुंची एक पेड़ पर, जहां लगे थे कुछ फल।
बैठा था पेड़ के नीचे, जहां शिकारी कुछ पल ।।
देख चिड़िया को वह, पल भर में ही मार दिया।
एक भूखे जीव ने, दूसरे का पेट भर दिया।।
मिट गई मानवता और, दया धर्म की सीख।
इसी लिए तो आज भी मांग रहा है भीख।
मानव भूख मिटाने को, बनाया प्रभु ने अनेकों आहार।
फिर भी क्यों हो रहा है, निर्बल जीवों पर प्रहार।।
अहिंसा की बीज बोकर, जीवों पर उपकार करो।
एक दिन सभी को मिटना है, इस पर भी विचार करो।।
मानव हो मन से धरा में, बिछा दो ममता की चादर।
खिल उठेंगे जीवों का जीवन, यही मेरा निवेदन सादर।।
हो श्रेष्ठ प्राणी संसार का, मानवता अपना दिखला जाओ।
प्रेम दया की राहें चलकर, करुणा अपना पिघला जाओ।।
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© चन्द्रहास सेन शिक्षक
ग्राम व पोस्ट कोसरंगी, थाना खरोरा
जिला रायपुर छत्तीसगढ़
पिन 493225
9752468692
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