(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "कलम मेरी पहचान" )
शुभ लग्न में हुआ नव वर्ष का धरा पे प्रवेष
देने को उपहार में लाया नव संदेश विशेष
युद्धोन्मादी देश को देता है आदेश
शीघ्र शमन करो युद्धोन्माद विशेष
संसार में शांति का करो तुम प्रवेश
हजारों बेगुनाह बालक वृद्ध युवा
कालकवलित कर रहे क्यों देश प्रदेश
विभिन्न वमों की तुम कर रहे बौछार
इससे विध्वंस का रहा हो रहा प्रसार
धूल धूसरित हो रहे धरा पर गिर रहे
जमीदोज कर हो रहे हैं भवन विशेष
क्या करुणा ममता मन में न रही शेष
धरा क्रन्दन कर रही है नर नारियां
युवा वृद्ध सब होते जा रहे दुखारी
भवनों के दिख रहे धरा पे अवशेष
नववर्ष के नैनों से बहती अविरल
अश्रू कोई पोंछने नहीं आया सर्वहारा
याचना करता नव वर्ष ईश्वर से
दया निधान दया करें मेरे जगदीश
सब को दो शुभ सम्मत्ति का विशेष संदेश
सर्वेजना सुखिनो भवन्तु
सर्वे संत निरामया सर्वे
भद्राणि पश्यंति मांकश्चित भाग भवेत
वसुदेव कुटुंबकम की भावना
का सबके मन में होय प्रवेश
समावेसी नब वर्ष का आया अब
देने सब को ये शुभ संदेश विशेष
शांति समन्वय का सबके मन हो प्रवेश
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उमेश चंद श्रीवास्तव नंवांकुर
92473 34421
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