(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "कलम मेरी पहचान" से)
किए है कठिन तपस्या,
हर वर्ष दिया जलाए है।
जब पर्व आया आयाम का,
हर जन को घुड़ पिलाए है।
आया है तब संकट धर्म पर,
मुख पर नारा ले छाए है।
राम-राम गून्जा भारत मे,
श्री राम-राम गुण गाए है।
ध्वझा लिए है लगे बान सा,
संकल्प नई बनाए है।
भगवा परचम लहराए है,
प्रभु राम अयोध्या आए है।।
नींद,चैन को त्यागे हम,
हर रात शोक मनाए है।
उठाया था कदम,
हर कदम पर ठोखर खाए है।
आए है सरकार काम के,
जो राम लला को लाए है।
ले जय कारा शिरी राम का,
धर्म ध्वजा लेहराए है।
पाया है बजरंगी सा शक्ती,
भक्ति मन ले दोहराए है।
भगवा परचम लहराए है,
प्रभु राम अयोध्या आए है।।
राम राम का त्यौहार लाए,
श्री राम को पुनः बुलाए है।
आया न्यायालय का इस्तीफ़ा,
सब का मन भाए है।
सोंचा कब साकार होगा सांकल्प,
अधिक शकुनाए है।
बाटा संदेशा शिरी राम का,
मंदिर सो पुनः बनाए है।
किये राम को धारण मनमे,
शत शत नमन सुनाए है।
भगवा परचम लहराए है,
प्रभु राम अयोध्या आए है।।
थमे तम पंचशतम बाद,
पर्व पर शत करोड़ हसाए है।
लिए मुख पर जयकारा,
रग-रग मे राम बसाए है।
मस्तिष्क मे नाथू-राम,
हातो मे परशु राम आए है।
राम-राम गुण मन,तन गाकर,
राम धुन भजाए है।
हम लगाए दीपक द्वार पर,
परिन्दे आ भुजाए है।
भगवा परचम लहराए है,
प्रभु राम अयोध्या आए है।।
सदियों तक है संघर्ष किया,
लाखो ने खून बहाए है।
जन जन को राम सुनाए है,
तन तन पे राम बुनाए है।
किए शत इस्तीफ़ा जारी,
सालोंके पश्चात सफलता पाए है।
ध्वस्त किये आक्रामी पहचान,
मंदिर वहीं बनाए है।
काले बादल छान्ट दिए,
अंधेरा दूर भगाए है।
भगवा परचम लहराए है,
प्रभु राम अयोध्या आए है।।
अब आया है समय
त्यौहार का सब पर्व मानाए।
सब को है राम बुलाए ,
सियाराम का गर्व सुनाए।
योगी बोले भगवा धारी,
हम लला राम को लाए है।
अरे बाटो पकवान,
शौर्य मनावो मेरे श्री राम आए है।
सीता बोले राम आए,
बंसी बजा घनश्याम आए है।
भगवा परचम लहराए है,
प्रभु राम अयोध्या आए है।
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© सूर्यवमशी
आदिलाबाद,तेलंगाना
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