(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "कलम मेरी पहचान" से)
बदला कैसे लूं तुमसे ------
बदला कैसे लूं तुमसे---------
आज भी हंसते हुए अच्छे लगते हो ।
अनजानी बातों पर यकीन कर
रुलाया न करो --------------
वैसे भी तुम ,
मेरी किस्मत में नहीं हो
फिर भी तूमहारे इंतज़ार के भूखें हैं हम
तुम्हें सोचना मेरी जिंदगी
तुम्हें देखना मेरी ईद ,
अब बताओ बदला कैसे लूं तुमसे -----
एक दिन हम चले जाएंगे इस दुनिया से
हमारा फ़ोन तो आफलाइन हो जाएगा
पर हमारी रुह तो तुम्हारे लिए आनलाइन रहेगी।
आसान नहीं हमें पढ़ना,
लफ़्ज़ों के नहीं जज़्बातों के किताब हैं हम
इस शहर में कितने लोग मिले
सब भूल गए कुछ याद नहीं
एक शख़्स किताबों जैसे था
वो शख़्स ज़ुबानी याद हुआ
अब बताओ बदला कैसे लूं तुमसे ------
अब बुरा नहीं लगता हमें, तुम नज़रंदाज़ करने से
बस इतना चाहते हैं, मेरी किस्मत में लिखी
हर खुशी तुम्हें मिलें, तुम जिसे चाहते हो
वो तुम्हें खुश रखें ,बस यही रही मिन्नत
खुदा से,बस यही रही मिन्नत खुदा से-------
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© फ़रज़ाना
हिंदी अध्यापिका
नलगोंडा
तेलंगाना।
94403 96378
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GEETA PRAKASHAN
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