(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "कलम मेरी पहचान" से)
कितनों ने त्यागे प्राण,
कितनों ने बलिदान दिया,
कितनो ने बहाई खून,
कितनों ने है संघर्ष किया,
कितने माँओ ने आंसू बहाई,
कितनो ने रुलाई पेटी को,
कितनो ने लड़ा अंग्रेजो से,
कितनो ने खाई सड़ी रोटी को,
धन्य धन्य हो हे धारणी,नमन है माँ तेरे माटी को।
अखंड भारत को तोड़ दिया,
हमारे संस्कृति को मोड़ दिया,
जो दिखता था स्वर्ग सा,
उस्स स्वर्ग को मारी मारी बनादिया,
जो थी सोने की चिड़िया,विश्व गुरू उसे बिखारी बनादिया,
किन्तु ना हारी तूने हार माँ,
खड़ी उठी हिमालय के चोटी को,
धन्य धन्य हो हे धारणी,सौगंध है माँ तेरे माटी को।
आये थे कभी मुघल यहा,
हमारे मंदिरों को ध्वस्त किया,
लूटी कन्याओंकी मान को,
उनको है जबरदस्त किया,
मारा करोड़ो लोगों के छाती को,
मारे थे देवभूमी के माती को,
छीना हमारे स्वाभिमान को,
छीने गरीब के रोटी को,
धन्य धन्य हो हे धारणी,नमन है माँ तेरे माटी को।
अब संकल्प नई सुनाएंगे,
हम भारत अखंड बनाएंगे,
अब हम तुमको है विश्व गुरु,
सोने की चिड़ियाँ बनाएंगे,
बनाएंगे सोने की धरती,
इक नई उजाला लाएंगे,
हीर,कनक सी तू बनजावे ,
तोड़ेंगे सीमा की कोटी को,
धन्य धन्य हो हे धारणी,सौगंध है माँ तेरे माटी को।
ऋषियों ने है सौगंध लिया,
ज्ञान से तुमको भर पूर किया,
भारत मे है वेद,पुरान
श्री कृष्ण ने गीता ज्ञान दिया,
अवनी बचाई भोड़े ने,
समुद्र मंथन से है विश पिया,
कण कण मे जहा भगवान देखे,
जहा हर कन्या मे सीता सी महान देंखे,
प्रणाम है माँ 33 कोटी को,
धन्य धन्य हो हे धारणी, नमन है माँ तेरे माटी को।
विश्व मे है तेरा नाम,
तेरा ही गुण गान रहे,
हर दीपक मे तेरा राम,
जग मे तेरा शान रहे।
जय जयकारा भारत हमारा,
जय जयकार सुनाएंगे,
वचन हमारा तुम को माँ,
ना भूलेंगे इस बलिदानी घाटी को,
बनाएंगे तुमको सोने की चिड़िया, विश्व गुरु, सौगंध है माँ तेरे माटी को।
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© सूर्यवमशी
आदिलाबाद,तेलंगाना
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