(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "यादगार शब्दों का सफर" से)
तुझे नमन है धरती माता
तेरी वायु बिना ना संभव
इस जग में जीवित रह
पाना,
तू ही जल से प्यास बुझाती
देती तू ही सबको दाना।
धरा न होती पांव तले तो
मानव तनिक नहीं चल पाता,
तुझे नमन है धरती माता।
धरती की गोदी में होती
माता के आंचल -सई ममता
इस पर फैले नील गगन में
पिता सदृश संरक्षण- क्षमता।
पंचतत्व के योगदान से
तू ही सबकी प्राण-प्रदाता,
तूझे नमन है धरती माता।
युगों -युगों से अपनी धरती
जड़ -चेतन को धारण करती
आवश्यकता सब पूरी कर
जीवन को खुशियों से भर्ती
सहनशक्ति का लेकिन इसकी
मानव अनुचित लाभ उठाता
तूझे नमन है धरती माता।
रुप धरा का नष्ट भ्रष्ट कर
करें नहीं हम इसको खंडित,
कुधद हुई यह कहीं अगर तो
विध्वंसों से होंगे दंडित।
रक्षित हो धरती मानव से जो जीवों में श्रेष्ठ कहाता,
तूझे नमन है धरती माता।
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© हरिराम साव
प्रधान पाठक
SaGES BASNA
स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल बसना ,
महासमुंद
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