(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित - डॉ (श्रीमती) बृजबाला गुप्ता "अर्चना' कृत साझा संकलन "यादगार शब्दों का सफर" )
धृतराष्ट्र की सभा में अन्यायी डटे हैं ,
भीष्म जैसे भी जिसमें मौन बैठे हैं ।
द्रोपदी के चीर हरण को सहते हैं ,
द्रोणाचार्य जैसे गुरु भी मौन रहते हैं ।
दुर्योधन जैसे अधर्मी का अन्न खाते हैं ,
इसीलिए कृपाचार्य भी स्वयं को विवश पाते हैं ।
अन्यायी की मित्रता ने सदैव दबाया है ,
इससे ही तो कर्ण भी न बच पाया है ।
द्यूत का नशा होता ही है सदा ऐसा ,
धर्म के प्रतीक युधिष्ठिर को भी बनाया पत्थर जैसा ।
भ्रातृ प्रेम ने बाँध ऐसा दिया था ,
अर्जुन के गाँडीव को भी कुंद कर दिया था ।
भीम जैसे महाबली की गदा भी न उठ पाई थी ,
नकुल सहदेव की तलवारें भी सुप्त हो गई थी ।
अस्त्र - शस्त्र सब लगते थे मौन ,
एक सती की रक्षा करेगा कौन ?
नि:सहाय हो श्रीकृष्ण को पुकारा ,
था ऐसी परिस्थिति में प्रभु का ही सहारा ।
चीर श्रीकृष्ण ने चिर तक फैलाया ,
दु:शासन भी चीर खींच - खींच घबराया ।
होश गवाँ धरा पर वह भी पड़ा था ,
पूरी कुरु सभा में सन्नाटा पसरा था ।
इसमें एक विदुर की वाणी मुखर थी ,
पर उनकी आवाज़ भी बेअसर थी ।
कुरु वंश का नाश तय हो चुका था ,
धरा का बोझ कम होने का वक्त आ चुका था ।
प्रतिज्ञाओं का तब सिलसिला चला था ,
भीम अर्जुन की प्रतिज्ञा ने सभी को खला था ।
अवश्य होगी इनकी प्रतिज्ञाएँ पूरी ,
अब तक इस वंश में रही न थी किसी की अधूरी ।
दु:शासन की छाती अवश्य ही फटेगी ,
तो दुर्योधन की जंघा भी अवश्य टूटेगी ।
शकुनि की चालें युद्ध में ना चलेगी ,
उस पर भी नकुल सहदेव की तलवारें भारी पड़ेगी ।
इच्छा - मृत्यु भी भीष्म को ना बचा पाएगी ,
उनकी देह भी बाणों के शय्या पर सो जाएगी ।
लाख द्रोणाचार्य चक्रव्यूह रच ले ,
पर धृष्टद्युम्न से वे भी बचकर देख ले ।
जयद्रथ को अस्ताचलगामी भी नहीं बचा पाएगा ,
अपनी मृत्यु के साथ वो पिता को भी अवश्य तार जाएगा ।
अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से भी पांडुवंश नष्ट न होगा ,
पर उसे तो धरा के प्रलय तक कष्ट ही होगा ।
जब - जब धरा पर अधर्म यूँ ही बढ़ेगा ,
तब - तब प्रभु को धर्म स्थापना हेतु आना ही पड़ेगा ।
💐💐💐💐💐💐
© डॉ. जगदीश चौहान
माध्यमिक शिक्षक
सी. एम. राइज़ विद्यालय, निसरपुर
जिला - धार ( म. प्र. )
98936 83983
-----------
संक्षिप्त परिचय
नाम :- डॉ जगदीश चौहान
पद :- माध्यमिक शिक्षक ( हिन्दी )
संस्था :- शासकीय सी.एम.राइज़ विद्यालय , निसरपुर
जिला -धार ( मध्यप्रदेश)
संपर्क सूत्र : 9893683983
रुचि :- काव्य लेखन , विभिन्न हिन्दू त्यौहारों पर काव्य सृजन , शिक्षण ।
----------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363

.jpeg)
No comments:
Post a Comment