(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित " यादगार शब्दों का सफर " साझा संकलन से)
शराब बिना ना शाम ढले
बिना शराब के होता नही पहर
चारो ओर शराब के दीवाने
कड़वी शराब होता मीठा जहर
नर - नारी और बूढ़े बच्चे
सभी को लगी होती इसकी लत
जो शराब से नाता जोडे
उसको नही कोई सुख और चैन
नशे मे चूर पर कोई भरोसा ना करे
हर पल होता अपमान ही अपमान
नशे मे पता नही उसे
होते है रिश्ते नाते दूर
टूट जाते माता पिता के सपने
खेत - मकान बिका - धन - तन खराब
जो शराब से प्रेम करे
उससे करते है सब द्वेष
अपने सभी देते है ताने
तो बीवी बच्चे जाते है टूट
जब तक बोतल साथ रहे
तब तक जिन्दगी होती बरबाद
पता है खराब आदत है ये
पड़ते नाली में सडक के बीच
इसलिए शराब को त्यागो जीवन मे
समझने की कोशिश करो समझाने पर
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© के कृष्णा कुमारी
97042 09042
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