(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "कलम मेरी पहचान" साझा संकलन से)
मैं जब भी झूठ के खिलाफ होता हूं,
यकीनन सच के ही साथ होता हूं ।
कर दिया है गैर सब ने मुझको बारी-बारी से ,
मैं फिर भी खुश हूं सुकून के साथ सोता हूं ।
पशेमान है खुद ही वही लोग देखो,
जिनके लिए हर बार मै गद्दार होता हूं ।
ख्वाहिश नहीं है मुझे किसी ताजपोशी की ,
मैं हूं मुसाफिर हूं जो लश्करों से दूर होता हूं ।
बेशक अकेला हूं उनकी गिरफ्त से दूर हूं,
भीड़ में रहकर भी मैं अशफाक होता हूं।
हर तरफ है तम का बादल,झूठ की पूरी नगरी है ,
प्रकाश पुंज की लौ को लेकर, मैं सच की अंकुर बोता हूं।
गर्म हवाएं, सर्द रवैया ,यह सब आनी जानी है ,
तुम मेरे होकर गैर हो गए, इस सोच से आंखें भिगोता हूं।
सच्ची बातें ,कड़वे लहजे , ये हैं मेरे असली रूप ,
झूठे रिश्ते, सच्चे हो जाए उम्मीद की माला पिरोता हूं।
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अनीता त्रिपाठी
98187 88075
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सहायक अध्यापक
बेसिक शिक्षा विभाग , गौतम बुद्ध नगर
* राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
सूर्य क्रांति फाउंडेशन
गौतम बुद्ध नगर।
* उपाध्यक्ष
शैक्षिक नवाचार संगठन
गौतम बुद्ध नगर।
इंटरनैशनल एजुकेशन एवार्ड से सम्मानित।
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