(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उड़ान मेरी कलम की "साझा संकलन" से संपादन - साधना ठाकुर)
।।। समाज में औरत ।।।
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मां बाप की सपना तूरी
जन्म से तू प्यारी
पापा की तू दुलारी
मां की तू न्यारी
फिर तू बन जाती सबकी लाडली
आगे चल तू लोगों की छोरी
फिर तू कदम रखी जवानी
तुझे देख जमाना हुआ दीवाना
उनमें जाग उठता है कामना
लेकिन जब तू बनी नारी
तेरे हुए अनेकों नाम
तेरा नामकरण किया समाज
ललना,महिला,वनीता, रमनी ,कामिनी
हर नाम में तू उत्तरी खरी
आभूषण नहीं रक्षा तेरी
गहने तो सिर्फ अलंकारी
आत्मसम्मान ही तेरी सवारी
दुष्टों के प्रति बन तू काली
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रजिया सुल्ताना
नज़रूलनगर नंबर 5
गवर्नमेंट हाई स्कूल
कागजनगर
कुमरामभीम आसिफाबाद
9701726390
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