Wednesday, March 8

क्या लिखूं कैसे लिखूं ? - एडवोकेट श्रीमती नीलिमा डेहरिया (गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उड़ान मेरी कलम की "साझा संकलन" से संपादन - साधना ठाकुर)

 

(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उड़ान मेरी कलम की "साझा संकलन" से संपादन - साधना ठाकुर)





।।। क्या लिखूं कैसे लिखूं  ?।।।  

💐----------------------💐


क्या लिखूं कैसे लिखूं, शब्दों का खजाना खाली है  ।

नारी अविराम कहानी है, इतिहास बनाने वाली है ।।

अनादि काल से वर्तमान तक, संघर्ष पताका फहराई ।

संपूर्ण विश्व के हर स्थल पर, विजय का परचम लहराई।।

घर में बेटी, बहना का, रूप लिए, सब पर स्नेह लुटाती है।

पर बात आन की जब आए, वह खुद ही मर मिट जाती है।।

स्त्री अब घर का सामान नही, वह पुरुषों के समकक्षी है।

है कुशल ग्रहणी गर नारी तो, हर विधा कला में दक्षी है।। 

दहलीज के अंदर से लेकर, वह अंतरिक्ष तक पहुंच गई ।

सहमी, ना डरी, ना कतराई, दुश्मन से भी जाकर  टकराई ।।

लज्जा, इठलाना, संकुचन, शर्मीला पन, नारीत्व की मर्यादा कायम रखकर  ।

हर दिशा में नारी आगे  बढ़ी,  ले संकल्प ,कमर कस कर।।

है कुशल नेत्री, मार्गदर्शिका, संपूर्ण समाज की नायक है। 

है वह भी देश की कर्णधार , पुरुषों की भाग्य प्रदायक है ।।

घर हो, बाहर हो, या युद्ध क्षेत्र, सीमा पर भी नारी निर्भीक खड़ी है । 

सागर तल, अंतरिक्ष , सघन वनों, ऊँचे  पर्वत के शिखरों पर  भी, नारी की विजय  ध्वजा फहरी है ।।

तू गागर है, तू सागर है, तू  बहती नदिया की धारा है।

तू दया मयी, तू रणचंडी, तू  जीवन पथ का किनारा है ।।

प्रकृति की सुंदर रचना की, सबसे अद्भुत  है कृती नारी ।

ममता स्नेह से परिपूरित, है ईश्वर की सुंदर छवि नारी ।

प्रखर, प्रचंड, प्रज्वलित अग्नि का तेज लिए, विषमय नीलिमारत रूप धरे । 

दुराचार, दूर्व्यसन, दुर्भावग्रस्त, दुष्टों को पल में नष्ट करें ।।

तू विश्व विजयी, तू जनाधार, जग जननी मार्ग प्रणेता है ।

हे नारी तू ही शिव का रूप,  तू ज्ञानमयी, विज्ञानमयी,  तू सिंह  सुता, तू ही नचिकेता है ।

तूने मान दिया, सम्मान दिया, और वक्त पड़े बलिदान दिया। 

खुद ने कष्टों का जहर पिया, और प्यार का अमृत बांट दिया।।

हे नारी शत-शत नमन तुम्हें तुम जीवन की अविराम कहानी हो अड़ जाओ तो पत्थर हो, वरना तुम निर्मल पानी हो ।।

क्या लिखूं कैसे लिखूं शब्दों का खजाना खाली है  ।।

नारी अविराम कहानी है ,इतिहास बनाने वाली है।।

----------------------------------------------------------------

एडवोकेट श्रीमती नीलिमा डेहरिया, 

निर्भीक

केवलारी, जिला सिवनी, म.प्र.।

70897 63839


-----------------------------------------------------------------


चलिए राष्ट्र को समर्पित करें अपनी कलम

हम सब मनायें आज़ादी का अमृत महोत्सव

 साहित्य से जुड़ने का अवसर, अपनी कविता/कहानी/साहित्यिक लेखों से प्रेरणा दें समाज को,,, 

अपनी रचना के प्रकाशन हेतु हमारी योजना का लाभ उठाएं Publish ur writing with ISBN

हर एक रचनाकार के लिए सूचना...

क्या आप अपनी रचना को विज्ञान की मदद से विश्वभर में उपस्थित पाठक तक पहुंचना चाहते हैं?

क्या आप भी भविष्य में साहित्यकार बनना चाहते हैं?

 गीता प्रकाशन की इस योजना से जुड़कर आप यह संभव कर सकते हैं।

जल्द आ रहा है एक साझा संकलन उड़ान मेरी कलम की

साधना ठाकुर  के संपादन में

प्रकाशित करेंगे जिसे ISBN भी प्राप्त होगा।

उसी रचना को हम हमारे ब्लॉगपोस्ट पर पोस्ट करेंगे जो विश्व में कोई भी कहीं भी मुफ्त में पढ़ सकेगा।

पुस्तक को amazon.in पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

है ना कमाल की योजना।

इस योजना से जुड़ने के लिए आपको बस हमें अपनी मौलिक रचना भेजनी है,,,

सदस्यता शुल्क 

₹500 कविता के लिए

₹1500 कहानी के लिए पर आपके लिए मात्र ₹1100

₹3000 साहित्यिक लेखों के लिए आपके लिए मात्र ₹1500

Gpay, ppay, Paytm 
9849250784

पुस्तक प्रकाशन के बाद 2 प्रति आप को घर पर भेजी जाएगी।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें
9849250784

प्राप्त रचना का प्रकाशन
पहले आओ
पहला स्थान पाओ 
के तर्ज पर किया जाएगा।

No comments:

Post a Comment

एहसास की खुशबू - सोहन ‘समीं‘ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")

    (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")     एहसास की खुशबू  💐.......................................💐...