(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उड़ान मेरी कलम की "साझा संकलन" से संपादन - साधना ठाकुर)
।।। क्या लिखूं कैसे लिखूं ?।।।
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क्या लिखूं कैसे लिखूं, शब्दों का खजाना खाली है ।
नारी अविराम कहानी है, इतिहास बनाने वाली है ।।
अनादि काल से वर्तमान तक, संघर्ष पताका फहराई ।
संपूर्ण विश्व के हर स्थल पर, विजय का परचम लहराई।।
घर में बेटी, बहना का, रूप लिए, सब पर स्नेह लुटाती है।
पर बात आन की जब आए, वह खुद ही मर मिट जाती है।।
स्त्री अब घर का सामान नही, वह पुरुषों के समकक्षी है।
है कुशल ग्रहणी गर नारी तो, हर विधा कला में दक्षी है।।
दहलीज के अंदर से लेकर, वह अंतरिक्ष तक पहुंच गई ।
सहमी, ना डरी, ना कतराई, दुश्मन से भी जाकर टकराई ।।
लज्जा, इठलाना, संकुचन, शर्मीला पन, नारीत्व की मर्यादा कायम रखकर ।
हर दिशा में नारी आगे बढ़ी, ले संकल्प ,कमर कस कर।।
है कुशल नेत्री, मार्गदर्शिका, संपूर्ण समाज की नायक है।
है वह भी देश की कर्णधार , पुरुषों की भाग्य प्रदायक है ।।
घर हो, बाहर हो, या युद्ध क्षेत्र, सीमा पर भी नारी निर्भीक खड़ी है ।
सागर तल, अंतरिक्ष , सघन वनों, ऊँचे पर्वत के शिखरों पर भी, नारी की विजय ध्वजा फहरी है ।।
तू गागर है, तू सागर है, तू बहती नदिया की धारा है।
तू दया मयी, तू रणचंडी, तू जीवन पथ का किनारा है ।।
प्रकृति की सुंदर रचना की, सबसे अद्भुत है कृती नारी ।
ममता स्नेह से परिपूरित, है ईश्वर की सुंदर छवि नारी ।
प्रखर, प्रचंड, प्रज्वलित अग्नि का तेज लिए, विषमय नीलिमारत रूप धरे ।
दुराचार, दूर्व्यसन, दुर्भावग्रस्त, दुष्टों को पल में नष्ट करें ।।
तू विश्व विजयी, तू जनाधार, जग जननी मार्ग प्रणेता है ।
हे नारी तू ही शिव का रूप, तू ज्ञानमयी, विज्ञानमयी, तू सिंह सुता, तू ही नचिकेता है ।
तूने मान दिया, सम्मान दिया, और वक्त पड़े बलिदान दिया।
खुद ने कष्टों का जहर पिया, और प्यार का अमृत बांट दिया।।
हे नारी शत-शत नमन तुम्हें तुम जीवन की अविराम कहानी हो अड़ जाओ तो पत्थर हो, वरना तुम निर्मल पानी हो ।।
क्या लिखूं कैसे लिखूं शब्दों का खजाना खाली है ।।
नारी अविराम कहानी है ,इतिहास बनाने वाली है।।
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एडवोकेट श्रीमती नीलिमा डेहरिया,
निर्भीक
केवलारी, जिला सिवनी, म.प्र.।
70897 63839
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