(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उड़ान मेरी कलम की "साझा संकलन" से संपादन - साधना ठाकुर)
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बिटिया रानी बड़ी सयानी
रुनझुन गीत सुनाती है
पूरा घर जब लगे सुहाना
जब बोले मीठी वाणी है
नवदुर्गा का रूप है बेटी
सत्यम शिवम सुंदरम बेटी
माँ की राज दुलारी है
पापा को जी से प्यारी है।
सावित्री बेटी सरस्वती बेटी
बेटी रानी लक्ष्मी है
मत मारो बेटी को पेट में
बेटी तो सारी सृष्टि है।
सच्चा स्नेह करती हैं बेटी
दौलत का लालच न करती
हाथ दिए का लेती हैं
कभी न धोखा देती हैं।
पराई होकर भी रहती अपनी
गैरों को भी अपना कहती हैं
अपने मन की कभी न कहती
सब कुछ दिल में सहती हैं।
धरती -सी गम्भीर हैं बेटी
अम्बर-सी धीर हैं बेटी
नैनों का नीर हैं बेटी
अनकही -सी पीर हैं बेटी।
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डॉ. आशुतोष (हिंदी प्राध्यापिका)
राजकीय महाविद्यालय जाटौली,
हेलीमंडी, गुरुग्राम
86849 11862
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