(मैं कविता...)

कन्हैया
वाट ढूढत फिरत नयन पुतली सब,
कब वह आवाज जगत गूंजी जयीहे।
आओ है कन्हैया वो बाल रूप ही धारित,
सुन्दर से सुन्दर सुमन खिल जयीहे।।
महक पायी जग जन मन लुभात तब,
बहकत सबही उधर चली जयीहे।
आओ मोरे घनश्याम जगत अजोर कर,
विकृत तमस वो स्वयं ही छटी जयीहे।।
हाहाकार थमत नजर आ जगत पल,
दीन हीन सबही वो प्रेम भरी जयीहे।
कहत गोपाल सब रटत श्याम सब,
आ मोरे कुंवर कन्हैया ही बसी जयीहे।।
प्रेम ही प्रेम मय गोकुल नन्द गांव सब,
प्रेम की किलकारी वो धुनी सुनी जयीहे।
मधुरी मधुर बस मधुर मयी करत,
मधुरम् मृदु रच बस सब जयीहे।।
राधे राधे राधे राधे राधे।
ओमप्रकाश द्विवेदी ओम
94153 63758
पूर्व प्रवक्ता, उदित नारायण इण्टरमीडिएट कालेज पडरौना कुशीनगर।
मान्यता प्राप्त पत्रकार।
प्रान्तीय प्रचार मन्त्री ग्रापये ।
अध्यक्ष, काव्यधारा सामाजिक, साहित्यिक व सास्कृतिक परिषद पडरौना कुशीनगर।
39 वर्ष शिक्षण कार्य पुनः दो वर्ष शिक्षण कार्य।
अद्यतन पत्रकार, सामाजिक सेवक व किसान।
छः रचनाए प्रकाशित
=============
त्रिपुट, दृष्टि, अंजली,ज्योति पथ,रजनीगंधा, रस कलश।
प्रकाशनाधीन - रश्मि, श्वेता, स्मृति, अनन्या ,कलिमस, मेरी डायरी, भोजपुरिया,बतकही।
जन्म - 15-06- 1952
जन्मस्धान - महुअवा बजराटार देवरिया।
योग्यता -स्नातकोत्तर
लेखन अनुभव- 51 वर्ष
ओमप्रकाश द्विवेदी ओम
पुत्र स्वामीनाथ द्विवेदी
माता श्री कुला देवी
पत्नी- श्रीमति बच्ची देवी
पुत्र - सत्यजीत कुमार द्विवेदी शिक्षक
तीन पुत्रियाँ- श्वेता, रश्मि, ज्योति।
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
-----------------------------------------------------------------------------------------------
Call 83417 38804 @ EDITOR Omkar Sardiwal
Call 9849250784 for more details on Book.
Book Published by
GEETA PRAKASHAN
Hyderabad
6281822363
-----------------------------------------------------------------------------------------------------

No comments:
Post a Comment