Tuesday, March 3

सुनील का संघर्ष और सफलता - (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "रंग - अक्षरों के")

  (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "रंग - अक्षरों के")



सुनील का संघर्ष और सफलता
💐............................................................💐


    यह कहानी है एक बेहद निर्धन परिवार के युवक सुनील की जो की सफलता की सीढ़ियां चढ़कर कुछ बन ना चाहता था। उसके पिता धर्मपाल एक दिहाडी़ी दार मजदूर थे और कभी-कभी सुनील को भी उनके साथ मजदूरी के लिए जाना पढ़ता था। अभी वह गांव के सरकारी स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ता था। उसके गांव मैं एक सरकारी माध्यमिक विद्यालय ही था। अब आठवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के पश्चात उसे 8 किलोमीटर दूर एक गांव में एक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जाना था। उसके पिता बड़ी मुश्किल से घर का खर्च चला पाते थे। सुनील के पास न तो अच्छे कपड़े थे और नए ही ट्यूशन पढ़ने के लिए पैसे, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे।

    सुनील की शिक्षा के प्रति इतनी लगन थी कि गांव में विद्यालय की कमी और सुख सुविधाओं के अभाव के बावजूद उसने कभी हार नहीं मानी। उसने पेड़ों की छांव मैं बैठकर पढ़ाई की। स्कूल के बाद वह गांव में साफ सफाई का कार्य करता था ताकि अपनी पढ़ाई और रहने का खर्च निकल सके। उसकी मेहनत तब रंग लाई  जब उसने बोर्ड परीक्षा में पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अब सुनील वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का विद्यार्थी था जो कि उसके घर से लगभग 8 किलोमीटर दूर था । परंतु घर से विद्यालय की दूरी ने उसकी शिक्षा के प्रति जुनून को कम नहीं किया। विद्यालय के एक शिक्षक ने सुनील की प्रतिभा को समझा और उसे आर्थिक व अन्य सहायता प्रदान करने में योगदान दिया। अपनी मेहनत में लगन से उसे शहर के एक बड़े कॉलेज मैं प्रवेश मिल गया था शहर के बड़े कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद उसे कई बार अपने अमीर सहपाठियों के उपवास का सामना करना पड़ा। लेकिन उसने अपमान को अपनी शक्ति बनाया और चुपचाप अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। सुनील की कड़ी मेहनत तब रंग लाई जब उसने वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की बोर्ड परीक्षा में भी पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया और आगे चलकर एक प्रशासनिक अधिकारी बना। सुनील ने यह साबित कर दिया कि सफलता का संबंध सुख सुविधाओं से नहीं बल्कि आपके आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम से होता है।  सुनील की कहानी उसके अधिकारी बनने के बाद एक नए और अधिक प्रभावशाली मोड़ पर पहुंचती है। अपना प्रशासनिक पदभार संभालने के बाद सबसे पहले अपने गांव गया और अपने माता-पिता के लिए नए कपड़े खरीदे और घर के लिए जरूरी सामान खरीदा। सुनील ने अपने पुराने स्कूल की मरम्मत करवाई जहां उसने पेड़ों की छांव में पढ़ाई की थी। सुनील ने देखा कि गांव में अभी भी कई बच्चे गरीबों के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सुनील ने अपनी देखरेख में गांव में एक आधुनिक पुस्तकालय खुलवाया और साथ ही एक कोचिंग केंद्र खुलवाया ताकि संसाधनों की कमी के कारण किसी और होनहार विद्यार्थी का रास्ता ना रुक सके । एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सुनील ने पूरी ईमानदारी से काम किया । जब उसके क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए फंड आया तो उसने सुनिश्चित किया कि एक-एक पैसा सही जगह खर्च हो । उसने उन लोगों का सामना भी किया जिन्होंने कभी उसकी गरीबी का मजाक उड़ाया था लेकिन उसने बदला लेने के बजाय उन्हें अपने काम से जवाब दिया । सुनील की मेहनत ने ने केवल उसके परिवार की गरीबी दूर की बल्कि वह पूरे जिले के लिए एक प्रेरणा बन गया।

सुनील की कहानी का अंत बेहद भावुक और प्रेरणादायक है। वर्षों की सेवा के बाद सुनील इस विद्यालय में मुख्य अतिथि बनकर लौटा । मंच पर खड़े होकर उसने अपने पुराने फटे थैले को सबको दिखाया जिसे उसने आज भी सहेज कर रखा था। सुनील ने मंच पर भरे गले से कहा कि यह थैला मुझे याद दिलाता है कि मेरी असली ताकत मेरी गरीबी नहीं बल्कि मेरा संघर्ष था।

उसे दिन सुनील ने स्कूल के सबसे गरीब लेकिन सबसे होनहार छात्र को अपनी व्यक्तिगत बचत से उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति देने की घोषणा की। जब उसे छात्र ने सुनील के पैर छुए तो सुनील को अपनी सफलता का असली अर्थ समझ आया। सुनील के पिता धर्मपाल गर्व से भरी आंखों के साथ कोने में खड़े होकर मुस्कुरा रहे थे।

उनकी मेहनत और बेटे के संकल्प ने मिलकर इतिहास रच दिया था।

----------------------------------------------------------

💐💐💐💐💐💐

© रजत सहगल

सिरसा (हरियाणा)
----------------------------------------------------------

Welcome to join us - New book - 
RELEASING SOON


चलिए राष्ट्र को समर्पित करें अपनी कलम

हम सब मनायें आज़ादी का अमृत महोत्सव

 साहित्य से जुड़ने का अवसर, अपनी कविता/कहानी/साहित्यिक लेखों से प्रेरणा दें समाज को,,, 

अपनी रचना के प्रकाशन हेतु हमारी योजना का लाभ उठाएं Publish ur writing with ISBN

हर एक रचनाकार के लिए सूचना...

क्या आप अपनी रचना को विज्ञान की मदद से विश्वभर में उपस्थित पाठक तक पहुंचना चाहते हैं?

क्या आप भी भविष्य में साहित्यकार बनना चाहते हैं?

"गीता प्रकाशन बुक्सवाला" की इस योजना से जुड़कर आप यह संभव कर सकते हैं।

जल्द आ रहा है एक साझा संकलन  
" साहित्याकाश रचनाकारों का ... "

प्रकाशित करेंगे जिसे ISBN भी प्राप्त होगा।

उसी रचना को हम हमारे ब्लॉगपोस्ट पर पोस्ट करेंगे जो विश्व में कोई भी कहीं भी मुफ्त में पढ़ सकेगा।

पुस्तक को amazon.in पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

है ना कमाल की योजना।

इस योजना से जुड़ने के लिए आपको बस हमें अपनी मौलिक रचना भेजनी है,,,

सदस्यता शुल्क 

₹500 कविता के लिए

₹1500 कहानी के लिए पर आपके लिए मात्र ₹1100

₹3000 साहित्यिक लेखों के लिए आपके लिए मात्र ₹1500

Gpay, ppay, Paytm 
9849250784

पुस्तक प्रकाशन के बाद 2 प्रति आप को घर पर भेजी जाएगी।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें
9849250784

प्राप्त रचना का प्रकाशन
पहले आओ
पहला स्थान पाओ 
के तर्ज पर किया जाएगा।
--------------------------------------------------------------------------
-----------------------------------------------------------------------
Call 9849250784 for more details on Book. 

Book Published by
GEETA PRAKASHAN BOOKSWALA
Hyderabad
6281822363
-----------------------------------------------------------------------------------------------------


scan to see on youtube



scan to join on WhatsApp

------------------------------------------------------------------------------


BOOK PUBLISHED BY :

GEETA PRAKASHAN

INDIA

Cell 98492 50784


---------------------------------------------------------------------------------

do you want to publish your writing through our BLOGPAGE ?

Please call us 62818 22363

No comments:

Post a Comment

सुनील का संघर्ष और सफलता - (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "रंग - अक्षरों के")

    (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "रंग - अक्षरों के") सुनील का संघर्ष और सफलता 💐.......................................