Tuesday, August 23

तुम आगे बढते रहो तुम्हारे साथ हम भी - सनल कक्काड (हिंदी हूँ मैं...)

 

 (हिंदी हूँ मैं...)




तुम आगे बढते रहो तुम्हारे साथ हम भी

तुम आगे बढते रहो 
तुम्हारे साथ हम भी।
तुम्हें याद है साथी
हमारा मधुर मिलन।
हमारी पहली मुलाकात
पाँचवीं कक्षा से हुआ।
दस्वीं तक तुम मेरे 
प्रिय साथी बन रही थी।
फिर तुम कुछ साल बाद
कॉलिज में मेरे पास लौटी।
उधर हमारे संबध
अटूट बन गए।
वहाँ से हम एक साथ
चलना शुरु कर दिए।
वीरगाथा काल के  राज़ों में
चंदबरदाई की रचना के साथ।
भक्ति काल में कबीर,तुलसी,
सूरदास जी के दोहाओं के साथ।
२ीतीकाल में प्रेम रूपी 
जायसी के पद्मावत के साथ।
गद्यकाल में द्विवेदी के
सरस्वती पत्रिका के साथ।
प्रसाद, निराला, प्रेमचंद
पंत और महादेवी जी के साथ।
हमारे रिश्ता आगे बढ गया
अब ................
रूपा देवी जी के
मैं हिंदी हूँ के साथ मैं भी
तुम में लीन हो गया ।
.......... अब तुम ( हिंदी)
अब तुम और भी बढती रहो
तेरे साथ मैं भी वरना हम भी।



सनल कक्काड
कक्काड मना
ऊरकम कीषुमुरी
मलप्पुरम
केरला 676519
फोन नम्बर 85908 16004
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मैं हिंदी हूँ.... 

 श्रीमती रूपा देवी द्वारा संपादित संकलन. 

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