Wednesday, August 3

"" नारी"" ( आदि और अनंत ) - छोटम रजनी (भारतीय साहित्य विविध स्वर)

 भारतीय साहित्य विविध स्वर

 


"" नारी"" ( आदि और अनंत )

                                                                 

नारी का परिचय ::=

ना :- नर का प्रारुप और प्रकृती का अंश है नारी ।

री :-  रीति- रिवाज़  और संस्कृति का स्तम्भ है नारी ।


कविता ::=


नारी तुम श्रध्दा  और आस्था के ध्येय  से तृप्त हो ,

अपने जन्म को सार्थक करती ऐसी पाषाण की कृति हो ।


हे नारी ! तुम भोर की उदित , प्रथम ओस की भक्ति का तार हो ,

गोधूली  बेला में मधुर स्वर में गूंजती अज़ान  का सार हो ।


तुझ बिन ये जग सूना था , कल भी और आज भी ,

तुम तो पुष्प गुच्छ की क्यारी हो , हर स्वर्णिम आँगन की भी ।


इन्द्रधनुष के अंचल में लिपटी, शुद्ध आधार-शिला तुम भूमि की हो ।

घनघोर घटाओं और दामिनी से खेलती ,ऐसी बिरवा तुम ताम की हो ।


कदमों में मुस्कुराकर भी तूने , पग -पग पर शूल धरी हो ,

जन्म ऐसा ही सौम्य और विकराल पाया तू ने , हर तम को हरण जो करती हो ।


नारी तुम तो श्रध्दा हो , ध्येय और धीर की ध्याता हो ,

सरल सघन सी, आस्माँ की, निश्चल सी ज्ञाता हो ।


तुम्हारा  जीवन है न आसान , तुम भी तो शिशिर ऋतु समान हो ,

आँचल के कोरो में भी तुम ने , मधुप खिलाएं कई तुम वो वसंत महान हो ।


बवंडर के धरातल पर भी , नित -दिन नवीन स्वप्न बुनती  हो ।

पत्थरीलि राहों पर भी चल कर ,हर आन्धी को तुम देती चुनौती  हो ।


हर क्षेत्र की ख्याति को मस्तक पर अपने , धारण करती नव-युग की नारी हो ।

पुरुष समाज की ध्योतक बन , प्रकाश पुंज में समाती इस युग की नारी हो ।


न तुम अबला हो , न तुम नश्वर हो , सबल -सबला औचित्य मान हो ।

अपनी अस्मत पर अड़िग तुम ,आत्म बल पर जीती हर हुनर खदान हो ।


नारी तुम श्रद्धा हो , आस्था हो, और ध्येय पूर्ण ममत्व हो ।

अपने जन्म को चरितार्थ करती ,तुम ऐसी विधाता की आध्या हो ।




छोटम रजनी 
Gr = ll हिन्दी पन्डित
सरकारी उन्नत पाठशाला  
मुशीराबाद,हैदराबाद ।500020
cell नम्बर = 9652054033

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