भारतीय साहित्य विविध स्वर
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ यूं मनाएं।
देश पर शहीद हुए क्रांतिकारियों के विचारों को अपनाएं।
धर्म-जाति, भेद-भाव, अमीरी- गरीबी से परे।
हिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाई आपस में गले लगाएं।
शुद्ध विचारों के अमृत से भारतीय संस्कृति को बचाएँ।
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ यूं मनाएं।
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ यू मनाएं।
युवाओं को बापू के सत्याग्रह की ताकत फिर याद दिलाएं।
नेताजी के पूर्ण स्वराज का दिल से आवाहन कराएं।
भारत की आत्म- निर्भरता हेतु श्रम और समानता अपनाएं।
आजादी के जननायक के संकल्प पर एक स्वच्छ भारत बनाएं।
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ यूं मनाएं।
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ यू मनाएं।
ज्ञान- विज्ञान से समृद्ध भारत को तेजी से आगे बढ़ाएं।
कला और साहित्य से भारत का दर्शन कराएं।
नर नारी हो एक समान, ना भेदभाव अपनाएं।
वसुधैव कुटुंबकम चरितार्थ को रोम रोम में समाएँ।
अमृत महोत्सव से भारत के भविष्य को अमृत पान कराएं।
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ यूं मनाएं।
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ यू मनाएं।
बदले हम तस्वीर जहां की सुंदर सा एक दृश्य बनाएं।
वैश्विक महामारी से बचने हेतु वृक्ष लगाएं, पर्यावरण बचाएं।
देश की माटी, देश का जल हो, हवा देश की, देश का फल हो।
देश का तन और देश का मन हो,देश के घर भाई बहन हो।
कवि रविंद्र ने बात कही जो, जन-जन में जागृति फैलाएं।
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ यूं बनाएं।
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ यूं मनाएं।
विश्व पटल पर भारत का स्वर्णिम इतिहास रचा है।
द्वंद कहा तक पाला जाए, युद्ध कहां तक टाला जाएं।
तू भी है राणा का वंशज,फेंक जहां तक भाला जाए।
अवनी से अंबर तक देखूं शान से तिरंगा लहराएँ।
भारत मां के भाल को यूं ही ऋंगारित करते जाएं।
आओ आजादी का अमृत महोत्सव कुछ क्यों मनाएँ।
99557 01210
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