(Mein Kavita ...)
जय दुर्गे, जय माँ दुर्गे
जय दुर्गे, जय माँ दुर्गे, पाप नाशिनी हे दुर्गे।
तू शिवप्रिया, तू चण्डिका है शेरावाली माँ दुर्गे।
तू विन्ध्वासिनी, महाशक्ति तू जय भवानी हे दुर्गे।
सबका कल्याण करती हो, बन गौरी दुःख तू हरती हो।
भूखों का निवाला बनकर,भक्तों की रक्षा करती हो।
सारे जग की माता हो, सबका पालन करती हो।
जय दुर्गे,जय माँ दुर्गे, सिंहवाहिनी हे दुर्गे।
गंगा तू,गोदावरी तू सरयू है, कावेरी तू।
सरस्वती और यमुना भी, मोक्षदायिनी हे दुर्गे।
हे भगवती, कुलदेवी, कालरूपिणी काली तू।
वसुधा तू वसुंधरा तू शिवा शाकम्भरी हे दुर्गे।
त्रिपुरसुंदरी, नृपनन्दिनी, सर्वधर्ममयी सिद्धि तू।
जय दुर्गे, जय माँ दुर्गे, कात्यायनी माँ दुर्गे।
हरिप्रिया, सिध्यविद्या, तू पद्मा, पद्मलोचना।
महाशक्ति, महामाता, नारायणी, तू महामना।
पद्मावती, सुवस्त्रा तू शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी।
माहेश्वरी, ब्राम्ही, कौमारी, चंडी, चंडपराक्रम।
सुगन्धा, मृगनाभि तू वेदशक्ति, शत्रुनाशिनी।
जय दुर्गे, जय माँ दुर्गे नवदुर्गे, जय माँ दुर्गे।
जय दुर्गे, जय जय दुर्गे सब बोलो माँ जय दुर्गे।
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