Thursday, July 21

शिवत्व में समाहित है विराट की अद्भुत कल्पना - डॉ सुशीला ओझा (भारतीय साहित्य विविध स्वर)

 भारतीय साहित्य विविध स्वर



शिवत्व में समाहित है विराट की अद्भुत कल्पना
                                                                 

शिव का शिवत्व इसलिए है.. 

वह दलितों, उपेक्षित को समादृत करते हैं. . 

शव को शिवत्व प्रदान 

करना उनकी प्रगाढ़ 

प्रेम का अंकुरण है... 

शिवा के शव को कंधे प्रतिष्ठित 

कर तांडव करना    .. 

शाश्वत प्रेम का सूत्र है  . 

सुदर्शन चक्र के स्पर्श से... 

इक्यावन पीठों की स्थापना.... 

शक्ति की आराधना... 

शव में शिवा का आधिपत्य.. 

शिवा अजर अमर है... 

शब्द अर्थ का अपूर्व 

समन्वय... 

पार्वती परमेश्वर की 

अद्भुत कल्पना 

भारतीय संस्कृति दर्शन 

का शिखरत्व... 

अर्द्धनारीश्वर की परिकल्पना... 

अभिन्नता, अ टूटता, अखंडता का भव्य दर्शन 

दर्शन यानि अंतरतम् 

की विराट अनुभूति... 

पशुपति नाथ हैं... 

बुजुर्गों को सर्वप्रथम 

सम्मानित करते हैं... 

जो बुजुर्गों को अभिनंदन

वंदन करता है... 

वही शिव मंदिर में प्रवेश 

करने का अधिकारी है. .. 

केवल कर्त्तव्य की 

श्रृंखलाओं में बंधकर 

 संगीत, नृत्य, व्याकरण 

शब्दों के लय, ताल छंद की 

रसमयता, ब्रह्मानंद की 

उपलब्धि.... 

डमरू से निकले काल दिक् 

का डिम डिम स्वर अनुप्राणित... 

मंदाकिनी सलिल से 

प्रथम अर्चिता... 

सौम्यता के उपासक. . 

नागराज का आलिंगन  नागेन्द्रहाराय से सुशोभित 

भस्म से इतना अनुराग 

सम्पूर्ण शरीर में भस्म का लेप... 

श्मशान वासी  सत्य सुन्दर 

के उद्घोषक, मृ त्युज्जय

समस्त विकृतियों को 

 कंठ में धारण कर 

नीलकंठ बन जाना... 

शिवत्व है... श्री नीलकंठाय

ध्वजा में बुढ़े बैल को प्रतिष्ठित कर बुजुर्गियत 

का सम्मान... 

व्योम केश दिक् अम्बराय 

अपर्णा को वाम भाग में 

प्रतिष्ठित कर... 

अपर्णा  की उत्सवधर्मिता 

मौलिकता, रचनात्मकता 

का रोचक, रम्य, मनोज्ञ 

परिकल्पना.... 

जिसका पर्ण अन्तस् में 

विकसित है.... 

वह प्रेम का अद्भुत प्रस्फुटन.. 

तांडव लास्य की अद्भुत

गतिशीलता, लयात्मकता

मौलिकता का अभेद्य कवच

प्रेम का भव्य, दिव्य दर्शन 

प्रेम शाश्वत है..!! सनातन है.!! अखंड है.. अछेद है.. अभेद है...!! 

सत्यम् है..!! शिवम् है....!! 

सुन्दरम् है... !! 

जीवन की उदात्तता, सात्विकता रमणी यता का 

भव्य रूप 

... 

श्रर्द्धा विश्वास का सनातन रूप... 

वन्दे बोध मयं गुरुं शंकररूपिण म्

यमाश्रितो हि वक्रो पि चन्द्र:सर्वत्र वन्द्यते 

ऐसा अद्भुत, अलौकिक 

परिकल्पना 

जिसमें अज्ञान को परिमार्जन कर ज्ञान का संवर्धन करना  

शंकर की अद्भुत क्षमता ही 

से संभव है... 

दलित, उपेक्षित, शोषितो, पीड़ितों के लोक नायक 

मिट्टी के पार्थिव पूजन 

की अभ्यर्थना से 

बम बम, हर हर  कर 

महादेव, आदिदेव, आदिगुरु 

के पदवी से विभूषित.. 

बस मंदार पुष्प से पूजित हैं 

हर हर महादेव गुंजायमान है मानवीय  मूल्यों का



डॉ सुशीला ओझा 

बेतिया,

प. चम्पारण


-------------------------------------------------------------------------------------

Call 9849250784 for more details on Book. 

-----------------------------------------------------------------------------------------------------


scan to see on youtube



scan to join on WhatsApp




BOOK PUBLISHED BY :

GEETA PRAKASHAN

INDIA

Cell 98492 50784

geetaprakashan7@gmail.com

---------------------------------------------------------------------------------

do you want to publish your writing through our BLOGPAGE ?

Please call us 62818 22363

1 comment:

  1. अद्भुत प्रस्तुति..

    ReplyDelete

एहसास की खुशबू - सोहन ‘समीं‘ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")

    (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")     एहसास की खुशबू  💐.......................................💐...