भारतीय साहित्य विविध स्वर
वर्ष पचहत्तरवे अमृतस्य महोत्सव,
जगत क्षितिज पर भारत महान है।
त्याग बलिदान संग कदम बढत जात,
बिन परवाह जान कदम बढत है।।
सुई जहाँ ना बनत टैक वही है बनत,
विश्वायतन क्षितिज भारत महान है।
लाल पाल बाल संग शिखर चढत बोल,
क्रांति दूत भगत सिह अति महान है।।
विस्मिल आजाद संग मौलाना आजाद रूप,
कमर तोड ब्रिटानिया होवे महान है।
बोस धोष उद्घोष चीरत फिरंगी महल,
गान्धी की तद गान्धीगिरी ही प्रसांगिक है।।
जकडे गुलामी बेडी अकड न ढीली पड,
विगुल बजा मंगल बने क्रान्ति दूत ही।
रानी हुंकार से थर्र थर्र कम्पित फिरंगी,
पग बढत नही पीछे भाग जात वही।।
तात्या पेशवा की वही बजी जब रण भेरी,
भागत फिरंग वही लंक लग जात है।
काया माया धर्म नही सह योग योग बनी,
परावलम्बन से निजात दिला देत है।।
अन्तह ही देश मे बहुतेरे फिरंगी बस,
खोखला करन मे दीमक बन जात है।
आधार चटने को आतुर प्रकम्पित वह,
वही घानी उल्टी पडत नजर आत है।।
अदम्य साहस संग प्रति नागरिक चल,
कमर तोड जात घिन जिन जेहन है।
स्मरण पल मात्र ही धैर्य धारित तब,
कर गुजारने की वो ललक दीखत है।।
देश यह हिन्दोस्तां जय हिन्द बोल संग,
श्रवण मात्र ही दरकत रिपु सदन है।
वलिदान की नीव पै महल खडा ही कर,
अमृत महोत्सव वो भारत सृजित है।।
भारत वही पर्व है भारतीय अवयव,
भारत बन आत्मा ही हर मे बसत है।
माटी को सलाम कर माटी ही महान मान,
फिरंगी नही देश सपूत हितकर है।।
बहनो ने बचन दे जौहर को ही पाकर,
भाई उत्साह बर्धन मे नही सकोच की।
माताए ही सही तज निज सुत भेज कर,
शौर्य के गाथा मे ही चार चाद लगा ही दी।।
ऐसो महान राष्ट्र की गुण गान कर हम,
महान से महान वह श्रेणी पावत है।
तरसत विश्व यह माटी तिलक बनाय,
माथे पर उसे लगाने को वह आतुर है।।
दृढता का रूप यह भारत महान यह,
तभी तो विश्व को राह प्रशस्त करत है।
उठती लहरे विविध विकराल रूप ले,
थम जाती वही जहाँ तलहटी सुलभ है।।
ऐसो महान की वह महानता बखान कर,
आ मिल हम सब भारत महान कहे।
महान मे महानता की दिव्य ज्योति छिट,
ओम स़ग हम सभी ही भाई भाई रहे।
ग्राम ल पोस्ट - महुअवा बजराटार
कुशीनगर।उ.प्र.।
सम्प्रति- इन्दिरा नगर पडरौना
94153 63758


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