(Bharat Ki Azadi Ka Amruth Mahotsav)
मेरे आराध्य
मेरे आराध्य
भारती के वीर पुत्र सीमा पर जो अड़े है
राष्ट्र की सुरक्षा हेतु शत्रुओं से जो लड़े है
शीत -धुप , रात - दिन प्रहरी बन जो खड़े हैं
हैं मेरे आराध्य वही, देवों से भी बड़े है
न हिंदू न मुसलमान है, न पंडित न रहमान हैं
जात-पात ऊंच-नीच न कोई भेदभाव है
सैनिक की कौम है, सब भारती के लाल हैं
मै जिनका हूं आराधक, वे वीर मेरे आराध्य हैं
जिनके दुखों से मेरा जीवन खुशहाल है
वही मेरे खुदा और मेरे रहमान है
सैनिक मेरे देश के मेरे भगवान है
नतमस्तक हूँ मैं सदा, नमन सौ बार है
शीत में भी जिनका बसेरा हिमालय है
उन्हीं से मंदिर और मस्जिद शिवालय हैं
चलता है देश उनसे, चलता न्यायालय है
शहीदों के समाधि स्थल मेरे देवालय है
आजादी में आता हम सबको आनंद है
आजादी से जीना हम सबको पसंद है
आजादी के खातिर हुआ वीरो का अंत है
आजादी के वीर सब मेरे भगवन्त है
जय हिन्द
विशाल कुमार भारद्वाज
एम.ए हिंदी ( विद्यार्थी )
उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद
तेलंगाना
99517 39531
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Call 89852 51271 @ EDITOR Dr. Sabbani Laxminarayana
Call 9849250784 for more details on Book.
-----------------------------------------------------------------------------------------------------


No comments:
Post a Comment