(Bharat Ki Azadi Ka Amruth Mahotsav)
ओ मेरी माँ!
आजादी के अमृत महोत्सव पर
मेरी ओर से तुम्हें प्रणाम।
कितने वीर शहीदों के
लहू पर मिली हुई यह आजादी
कितने वीर माताओं के
लाल के त्याग पर मिली यह आजादी
कितने औरतों के सौभाग्य पर
मिली यह आजादी
ओ मेरी माँ! तुम्हें प्रणाम।
आज हमारी यह खुशी
जिनके प्राण बलिदान से मिली,
उन सभी को मेरा प्रणाम।
ओ मेरी माँ !
तुम कितनी सुंदर गुलदस्ता हो
जो सभी मत,
धर्म के गुलों से
बनी हो।
जब आजादी के अवसर पर
तुम कितने अपने फूलों को
खो कर यह आजादी पायी हो।
उस मिट्ठी में मैं जन्मी हूँ।
कितना सौभाग्य है मेरा ।
पूरे गर्व के साथ कहती हूँ कि
जय हो मेरी भारत माँ की
जय हो......
नागराणि. आर
हिंदी व्याख्याता ,
टी. जे.पी.एस .कॉलेज,
गुण्टूर.
7207777863
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