(Bharat Ki Azadi Ka Amruth Mahotsav)
तेरे हवाले मेरी जां है सनम
ये धरती मेरी मां है सनम
सब्र कर दो पल मैं चलता हूं सनम
चंद सांसे गोद में और जीने दे सनम
दुश्मन जो सर पर खड़ा है सनम
उससे दामन तो बचा लू सामान
तेरे हवाले मेरी जां है सनम ।।
वादा करके मुकर जाए यह हमने सीखा नहीं
वो लकीर तो बना दूं, वो शोले तो लगा दूं
उनके कदमों के नीचे अंगारे बिछा दूं
मां को सुरक्षा का घेरा बना दूं
चंद सांसे ही तू और दे दे सनम
तेरे हवाले मेरी जां है सनम ।।
वो आखिरी दहाड़ तो मारूं सनम
कलेजा थम जाए सांसे रुक जाए
दुश्मन जहां हो वही वो जम जाए
ख्याल से पहले मेरा चेहरा बना दूं
उसकी सांसे रोक दू, वो हो हवा तो फैला दूं
फिर चलता हूं सनम, थोड़ा सब्र कर
तेरी आगोश में सोता हूं सनम।।
तुम ना राम बनो ना लक्ष्मण बनो
अपनी मां की खातिर नरसिंह बनो
जिस चौखट से प्रवेश करें वही उसे तुम चीर दो
शिवाजी सी दहाड़ रखो
महाराणा प्रताप का भाला बनो
देश के वीरो में इनका बीज तो बोता चालू सनम
तेरे हवाले मेरी जां है सनम ।।
जिसने सपने देखे उसे कैसे छोड़ूं सनम
आज दामन मां का लहू से भीगा सनम
अगर तू अडजाये तुझे भी फना कर दूं
आज दो कदम आगे बढ़कर तिरंगे को लगा दूं सनम
तू रो के मुझे तुझ में वह दम नहीं सनम
जीत का जश्न मना कर ही अपनी आंखें मूंद ओ सनम ।।
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