(Bharat Ki Azadi Ka Amruth Mahotsav)
भारत मेरा स्वाभिमान
नमन है मेरा उस देश को ,
जहाँ जन्म मेरा अस्तित्व है ।
चरण वंदन है उस देश को ,
जिसकी आन ,बान व शान है ।
तिलक करे हम उस माटी से ,
जिसके आँचल में सोया राजवीर है ।
गाते है हम उन गाथाओं को आज भी ,
जिसमें मणि,पन्ना ,रज़िया जैसी धीर है ।
सूफी फकिरों के इस देश में,
मन्त्र और गुरबानी के मेले है ।
हिंद की माटी ऐसी,
जिसमें लिपटा , यमन ,तुर्की और अफ़गानी है ।
हिमालय की अडिगता
और छप्पन कुल का योग लिये ,
आज खड़ा है देश मेरा ,
अपने अभिमान का अमृत पीये ।
मेरे देश की माटी की ये रंगत ,
आज अजीब सी रंग लाई है ।
हिंसा की होली जलकर ,
अज्ञानी ने बैठ मलाई खाई है ।
भारत माँ का मान आज भी ,
सिर चढ़कर डोल रहा है ।
इसका ही रक्षक आज ,
भक्षक बन दौड़ रहा है ।
छोटम रजनी
Gr = ll हिन्दी पन्डित
सरकारी उन्नत पाठशाला
मुशीराबाद,हैदराबाद ।500020
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