काव्य धारा
तुम नारी हो,
नर की शान हो।
तुम नारी हो,
नर की शोभा हो।
तुम नारी हो,
सद्गुण संपन्न गृहस्थी हो।
तुम नारी हो,
सीता-सावित्री जैसी तेजस्विनी हो।
तुम नारी हो,
शौर्य की अधिष्ठात्री हो।
तुम नारी हो,
मैत्रेयी-गार्गी जैसी प्रकांड विदुषी हो।
तुम नारी हो,
देना ही जाननेवाली अन्नपूर्णा हो।
तुम नारी हो,
अहर्निशं सेवामही हो।
तुम नारी हो,
तुम्हारे कदमों तले
स्वर्ग ही स्वर्ग सजग हो।
तुम नारी हो,
अबला नहीं सबला हो।
तुम नारी हो,
कुसंस्कारियों पर धनुर्धारी हो।
उज्मा उल्फत
यम.बी.बी.यस( तृतीय वर्ष)
खम्मं।
70132 43207
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काव्य धारा
Editor
Prasadarao Jami
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