Tuesday, March 29

एक चूहा और चालक मेंढक - सुनीता प्रयाकरराव (कथा सरोवर)

कथा सरोवर


एक चूहा और चालक मेंढक

सुनीता प्रयाकरराव



    बहुत समय पहले की बात है, किसी घने जंगल में एक छोटा-सा जलाशय था। उसमें एक मेंढक रहा करता था। उसे एक दोस्त की तलाश थी। एक दिन उसी जलाशय के पास के एक पेड़ के नीचे से चूहा निकला। चूहे ने मेंढक को दुखी देखकर उससे पूछा, दोस्त क्या बात है तुम बहुत उदास लग रहे हो। मेंढक ने कहा, ‘मेरा कोई दोस्त नहीं है, जिससे में ढेर सारी बातें कर सकूंँ । अपना सुख-दुख बताऊंँ ।’ इतना सुनते ही चूहे ने उछलते हुए जवाब दिया, ‘अरे! आज से तुम मुझे अपना दोस्त समझो, मैं तुम्हारे साथ हर वक्त रहूंँगा।’ इतना सुनते ही मेंढक बेहद खुश हुआ।

    दोस्ती होते ही दोनों घंटों एक दूसरे से बातें करने लगे। मेंढक जलाशय से निकलकर कभी पेड़ के नीचे बने चूहे के बिल में चला जाता, तो कभी दोनों जलाशय के बाहर बैठकर काफी बातें करते। दोनों के बीच की दोस्ती दिनों-दिन काफी गहरी होती गयी l चूहा और मेंढक अपने मन की बात अक्सर एक दूसरे से साझा करते थे। होते-होते मेंढक के मन में हुआ कि मैं तो अक्सर चूहे के बिल में उससे बातें करने जाता हूंँ, लेकिन चूहा मेरे जलाशय में कभी नहीं आता। ये सोचते-सोचते चूहे को पानी में लाने की मेंढक को एक तरकीब सूझी।

    चालाक मेंढक ने चूहे से कहा, ‘दोस्त हमारी मित्रता बहुत गहरी हो गयी  है। अब हमें कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे एक दूसरों की याद आते ही हमें आभास हो जाए।’ चूहे ने हामी भरते हुए कहा, ‘हांँ  जरूर, लेकिन हम ऐसा करेंगे क्या?’ दुष्ट मेंढक फटाक से बोला, ‘एक रस्सी से तुम्हारी पूंँछ और मेरा एक बार पैर बांँध दिया जाए, तो जैसे ही हमें एक दूसरे की याद आएगी तो हम उसे खींच लेंगे, जिससे हमें पता चल जाएगा।’ चूहे को मेंढक के छल का जरा भी अंदाजा नहीं था, इसलिए बोला चूहा एकदम इसके लिए राजी हो गया। मेंढक ने जल्दी-जल्दी अपने पैर और चूहे की पूंँछ को बांँध दिया। इसके बाद मेंढक ने एकदम पानी में छलांँग लगा ली। मेंढक खुश था, क्योंकि उसकी तरकीब काम कर गयी । वहीं, जमीन पर रहने वाले चूहे की पानी में हालत खराब हो गयी l कुछ देर छटपटाने के बाद चूहा मर गया।

    बाज आसमान में उड़ते हुए यह सब रहा था। उसने जैसे ही पानी में चूहे को तैरते हुए देखा तो बाज तुरंत उसे मुंँह में दबाकर उड़ गया। दुष्ट मेंढक भी चूहे से बंँधा हुआ था, इसलिए वो भी बाज के चंगुल में फंस गया। मेंढक को पहले तो समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या। वो सोचने लगा आखिर वो आसमान में उड़ कैसे रहा है। जैसे ही उसने ऊपर देखा तो बाज को देखकर वो समझ  गया। वो भगवान से अपनी जान की भीख मांँगने लगा, लेकिन चूहे के साथ-साथ बाज उसे भी खा गया।


कहानी की सीख : 

    दूसरों का नुकसान पहुंँचाने की सोच रखने वालों को खुद भी नुकसान उठाना पड़ता है। जो जैसा करता है, वो वैसा ही भरता है।



सुनीता प्रयाकरराव

हिंदी अध्यापिका, 
करीमनगर, 
9553599001
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कथा सरोवर
Editor
Prasadarao Jami

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