स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
मेरे कलम की स्याही है...
राष्ट्रभाषा है, विश्व भर सम्मानित भाषा है...
जन-जन की वाणी है...
हर दिल की धड़कन है...
मेरी पहचान है,मेरा अभिमान है...
मेरा संसार-मेरा जीवन का आधार है...
मेरे कलम की स्याही है...
मेरे अक्षरों में समायी है...
प्यारी,दुलारी है, हिंदी हमारी है...
तुलसी,मीरा,जायसी की शान है हिंदी...
निराला,प्रेमचंद की लेखनी का गान है हिन्दी...
हिंदी भाषा मात्र ही नही...
हमारे जीने की आस है...
सहस्र वंदना करती हूँ तुम्हें...
हर सांस में बसाती हूँ तुम्हें...
मीठे-मीठे वचनों में सजाती हूँ तुम्हें...
सुंदर-सुंदर कविताओं में संवारिती हूँ तुम्हें...
श्रीदेवी बद्री (सिरिराम)
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के महिला सचिव, राजश्री उपाधि
जिला परिषदउन्नतपाठशाला,सिद्दाला,
चेंनुर मंडल, मांचेरियाल जिला।
98495 83188
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