स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
जय जवान जय किसान
जय जवान बोलो भाई जय किसान,
तुम्हारी तलवार और हमारा धान,
फुकट की रोटी क्यों खावे शैतान।
फिर भी झूठी तारीफ करें नादान,
हम है भारत मां के संतान।।
जय जवान बोलो भाई जय किसान,
गर्मी में करते हैं हम पसीनो से स्नान,
लफंगा सोता है ए सी मकान।
यह क्या जाने दिल जो, हैवान,
हम हैं भारत मां के संतान।।
जय जवान बोलो भाई जय किसान,
भारत मां का अंग सजे,
बहने दे खून नदी समान,
हम तेरे संतान, हम तेरे संतान माते, हम तेरे संतान।।
तेरे ही कण कण से बना है जीवन,
तेरे लिए मरना है पावन,
बस तेरी लगी है लगन माते,
हम तेरे संतान हम तेरे संतान माते, हम तेरे संतान।।
अंक दिखाएं शीशा तोड़ देंगे,
हाथ उठाए जान काड देंगे।
हम तेरे जवान माते,
हम तेरे संतान ,हम तेरे संतान माते हम तेरे संतान।।
जान तोड़कर जंग लड़ेंगे,
दुश्मनों के हाथ पैर तोडेंगे।
तुझे करते हैं प्रणाम माते,
हम तेरे संतान ,हम तेरे संतान माते, हम तेरे संतान।।
97056 32624
----------------------------------------------------------------------------------
No comments:
Post a Comment