स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
विजय पथ के विजयवीर
तुम बढ़े चलो तुम बढ़े चलो*
शौर्य की मशाल हो तुम
राष्ट्र शिखर के साधक
शक्ति के बन आराधक
सत्य पथ गढ़ते चलो!
विजय पथ के ---
अमृत पुत्र श्री तेज तुम
शैलांचल की तुम मुस्कान
नव युग का तुम बांध कलावा
चेतना का संचार करो!
विजय पथ के----
अरुण की अरुणाई तुम
तरुण की तरुणाई भी
वरुण का करके वरण
मूर्छा जन की दूर करो!
विजय पथ के--
विद्युत की गति तुम्हीं से
सरिता में करुणा जल धारा
जगत् का कर तुम कल्याण
क्षेम गगन गान रचते रहो!
विजय पथ के..
अभिनव भारत के कर्णधार
शुभ संकल्पों के स्तंभ तुम
मानवता का ध्येय ध्यान लिए
बंधुत्व संसार साकार करो !
विजय पथ के ---
रघु धरा का धैर्य तुम
भूषण के तुम प्रिय प्रताप
यशोनन्द का बन अभियान
धर्म जय उद्घोष करो !
विजय पथ के---
डॉ सुरभि दत्त
99489 99258
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