स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
सोने की चिड़िया
भारत मां के हाथ बांध के
खौदी कर दी आक्रमणकारी
भरत जाति को दास्य बना दी
दुष्ट आत्माओं के दाष्टिक चर्या
कदम कदम पर अपमान
बात बात पर अपहास्य
बहुत सहा है आत्माभिमान यह
बागी बना है राज्याभिमान यह
देशवासी ने कदम उठाए विद्रोह में
आजादी अब अंतिम लक्ष्य उनका
अमीर गरीब अब सब एक तरफ़
जात पात से अतीत एक पथ में
शरीर को सुखा दिया
शांति की राह में गांधीजी ने
फांसी को चूम लिया
आज़ादी के प्रेम में भगतजी ने
बंदूक को सीना दिखाया
स्वराज्य कामी अल्लुरी ने
अखंड भारत का नींव डाली
लोह पुरुष सरदार पटेल ने
स्वराज्यकांक्षा के राह में चलके
शहीद हुए हैं क्रांतिकारी अनेक
त्याग के फल ने विमुक्ति लाई
दीन जनावलि स्वेच्छा पाई
मेधो शिल्पी दार्शनिक अनेक
नए भारत का नक्शा बनाया
उनके कदमों से कदम मिलाके
अवतरित हुआ आत्मनिर्भर भारत
पचहत्तर साल के यौवन में
दृढ़ शरीर तेज़ मेधा
संसार को अपनी ओर खींचते
उज्वल भारत का निर्माण हुआ
क्रांति के इतिसास स्पूर्ति पाठ हैं
अभ्युन्नति ही आदर्श होकर
अमृत फल देनेवाले जाति रत्न
इतिहास के पन्नों में रह गए
घायल सोने की चिड़िया
अपने पंख फड़फड़ाए है
उड़ती रही है ऊपर की ओर
संसार को आलंबन बनने।
रूपा देवी
89850 00627
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