स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
प्रभू मैं तुम्हे कहाँ खोजूं
हम ढूंढ रहे तुम्हे ऊँचे शिखरों पर
चंचल बहती नदियों में
महाकते सुन्दर फूलों में
नीले – नीले आकाश में
तुम्हारी तलाश में मेरा मन प्यासा भटका
पर ना मिले तुम मुझे
मंदिर, मस्जिद, गुरुदारे और गिरिजाघर में
तुम्हारी परछाई दिख रही थी
मगर तुम ना मिले प्रभु
एक गहरे मिठास भरे स्वर ने
हम से कहा
हम थो उल्फ़त का सागर हैं
पाना चाहते हो हमें तो
अपने दिल की गहराई में देखो
हम तुम्हे वहीँ मिलेंगे ...
पि सबिता कृपाकर
9949350569
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for Printed Book
स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
Editor
Prasadarao Jami
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