स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
वसंतोत्सव
आया वसंत ऋतु आया,
सारा जंगल फूलो से सजाया।
कितने सुंदर फूल रंग-बिरंगे,
मन को मोहित करनेवाला आया।।
पेडों का हुआ पतझड,
आये कोमल पत्ते चमकिले।
शोभा पेडों की बढाने आया,
मन को हमारे आनंद देने आया।।
पेडों पर कोयल बैठकर,
सुंदर मधुर गीत सुनाती।
उस मीठे गीत को सुनकर,
मन में हमारे खुशी भरने आया।।
बाग-बगीचों मे हरियाली लायी,
सुंदर-सुंदर फूल सजायी।
तितली-भौंरे झूम नाच गाते,
प्रकृति मे नयी शोभा लायी।।
बूढो मे जवानी लायी,
यौवनों मे सुंदरता लायी।
मधुमक्खियों की स्वाद लायी,
हमारे जीवन में नयी खुशियाँ लायी।।
मंगलदास काम्बले
94942 52203
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स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
Editor
Prasadarao Jami
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