स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
प्रतिवेदन
अम्मा जननी धरती माता मंजिल की माँ
पल पल हर पल हर समय
जिस दिन हम तुम्हे याद नहीं करेंगे
हमसे बड़ा कृतज्ञ दूसरा कोई नहीं होगा
हम सालों भर इस मिट्टी में
खेलते-खेलते बड़े हुए हैं
हमने आपकी गोद में शानदार
इमारतें और सड़कें बनाई हैं
हमारा जन्म और विनाश आप से है
आपकी वजह से, और आपके साथ
हालांकि, हम प्रकृति की हरी-भरी
हरियाली को नष्ट कर रहे हैं
तुम जीवन प्रदायिनी हो लेकिन
हम सभी जीवित प्राणियों के लिए
एक मृत्युलेख लिख रहे हैं।
हम कृषि भूमि को मरुस्थल में बदल रहे हैं।
हम ऑक्सीजन को कार्बन डाइऑक्साइड में बदल रहे हैं
आपके शरीर को घावौं से भराकर
हम विकास फल समझते है
आप भयानक तबाही मचा सकते हैं
और हमें आप में इस मिट्टी में मिला सकते हैं लेकिन
तुम बहुत शांत हो! सहिष्णु हो !
शोषक जो आपको बंधक बना रहे हैं
हम चिल्लाएंगे... नारे लग्गाएँगे ...
सच्ची आज़ादी,के लिए मुट्ठी बांधेंगे
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