स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
नाम अगर हो अनुराग का कोई दूसरा
नाम अगर हो अनुराग का कोई दूसरा
तो वह होगा नाम मेरे भैय्या का
हो अगर स्नेह की कोई मूर्ति
तो वह होगा नाम मेरे भैय्या का
कष्टों को जो मेरी आँखों से दूर रखें
दुःखों को भी मेरे पास न भटकने दें
मेरी रक्षा करने से एक क्षण भी जो न थकें
प्रेम बांटने में जो श्रेष्ठ स्थान रखें
नाम (सरनेम) भले ही देकर पिता चले गए
बेटी के प्रति क्यों न मां ने सारी जिम्मेदारियां निभाई
मेरी जिम्मेदारी के श्रम का श्रमिक बनकर जो सदैव तपस्या करें
मेरी खुशी को अपना ऐश्वर्य मानकर
मेरी प्रगति को ही अपना अंतिम लक्ष्य माना
स्वयं को भुला कर, जिसने मुझे ही स्वयं (सर्वस्व) माना
मैं उन्हें भला क्या दे सकती हूं?
सिवाय इस एक वादा के कि:
यदि हो कोई जन्म दूसरा, तो देकर उन्हें जन्म....
बनूंगी मैं उनकी मां, करती हूं मैं यह वादा।
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