स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
हिंदी है महान
भोली भाली प्यारी हिंदी
भारत देश की दुलारी हिंदी
कजरा पायल कंगन बिंदी
इन सबमें बस खनके हिंदी
आज़ादी की जान बनगई
भारत का आसमान बनगई
सागर जैसी गहराई इसमें
अन्य भाषा भी समाले ख़ुदमें
आर से लेकर पार तक
हर देश के द्वार तक
खिल-खिल मुसकाती जाए
भारत देश की शान बढ़ाये
इसके साहित्य सागर में डूबो
किनारे पर पहुँचादेगी
अपनाकर देखो हिंदी को
तारों सा चमकादेगी
हिंदी, तूने साथ निभाया है
तुझे न अब हम छोडेंगे
तुझे ही स्रोत बनाकर अब हम
सारी दुनिया जोडेंगे
हिंदी अध्यापिका
जि.प.उ.पा दगडा
चिन्नमबावी
वनपर्ति
8374413342
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